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लक्षद्वीप के प्रशासक को वापस बुलाए जाने की मांग करने वाला प्रस्ताव केरल विधानसभा में पारित

By भाषा | Updated: May 31, 2021 15:07 IST

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तिरुवनंतपुरम, 31 मई केरल विधानसभा ने लक्षद्वीप के लोगों के साथ एकजुटता जताते हुए एक प्रस्ताव सोमवार को सर्वसम्मति से पारित किया, जिसमें द्वीप के प्रशासक प्रफुल खोड़ा पटेल को वापस बुलाए जाने की मांग की गई है आौर केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया है, ताकि द्वीप के लोगों के जीवन और उनकी आजीविका की रक्षा हो सके।

इसी के साथ केरल देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने केंद्रशासित प्रदेश में हुए हालिया घटनाक्रमों को लेकर लोगों का समर्थन करते हुए प्रस्ताव पारित किया है।

अरब सागर में स्थित लक्षद्वीप में पटेल के हालिया कदमों एवं प्रशासनिक सुधारों का स्थानीय लोग पिछले कुछ दिन से विरोध कर रहे हैं।

केरल के मुख्मयंत्री पिनराई विजयन ने सरकारी प्रस्ताव पेश किया, जो 15वीं विधानसभा में इस प्रकार पहला प्रस्ताव है। उन्होंने केरल और लक्षद्वीप के लोगों के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को याद किया और वहां स्वाभाविक लोकतंत्र को नष्ट करने की कथित कोशिश के लिए केंद्र की निंदा की।

उन्होंने कहा कि लक्षद्वीप का भविष्य चिंता का विषय है और इसकी अनूठी एवं स्थानीय जीवनशैली को कमजोर करना अस्वीकार्य है।

मुख्यमंत्री ने अपील की कि संवैधानिक मूल्यों को बरकरार रखने का समर्थन करने वालों को लक्षद्वीप के प्रशासक के कदमों का कड़ा विरोध करना चाहिए।

अपने राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करते हुए, सत्तारूढ़ माकपा के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के सदस्यों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव का समर्थन किया। यूडीएफ ने इसमें कुछ संशोधनों का सुझाव दिया।

प्रस्ताव में कहा गया है कि लक्षद्वीप में स्थानीय जीवन शैली एवं पारिस्थतिकी तंत्र नष्ट करके ‘भगवा एजेंडे’ और कॉरपोरेट हितों को थोपने की कोशिश की जा रही है।

इसमें आरोप लगाया गया है कि सुधार के नाम पर शुरू किए गए एजेंडे का क्रियान्वयन नारियल के पेड़ों को भगवा रंग से रंगकर शुरू किया गया और अब यह इस स्तर तक बढ़ गया है कि द्वीपवासियों के पारंपरिक आवास, जीवन और प्राकृतिक संबंधों को नुकसान पहुंच रहा है।

प्रस्ताव में कहा गया है कि द्वीप में अपराध की दर असाधारण रूप से कम है, इसके बावजूद गुंडा कानून लागू करने के लिए कदम उठाए गए।

प्रस्ताव में कहा गया है कि प्राधिकारी मछली पकड़ने जैसे आजीविका के पारंपरिक जरिए को नष्ट करना चाहते हैं।

इसमें आरोप लगाया गया है कि क्षेत्र के लोगों के प्राकृतिक आहार का हिस्सा कथित गोमांस को बाहर करने के प्रयास के जरिए गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने के संघ परिवार के एजेंडे को पिछले दरवाजे से लागू किया जा रहा है।

प्रस्ताव में कहा गया है कि प्रशासक ने केंद्रशासित प्रदेश के लोगों के स्थानीय जीवन और संस्कृति को धीरे-धीरे नष्ट करने का बीड़ा उठाया है।

विजयन ने प्रशासक को विभिन्न सरकारी विभागों के मामलों में हस्तक्षेप करने का विशेष अधिकार देने वाले केंद्र के कानून की निंदा की।

उन्होंने कहा कि यह अपनी पसंद के अधिकारी नियुक्त करके द्वीप के स्वाभाविक लोकतंत्र को कमजोर करने के समान है।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘‘लक्षद्वीप में हालिया घटनाक्रम को संघ परिवार के एजेंडे की प्रयोगशाला के रूप में देखा जाना चाहिए। वे देश के लोगों की संस्कृति, भाषा, जीवनशैली और खानपान संबंधी आदतों को अपनी विचारधारा के अनुसार बदलने की कोशिश कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि केंद्रशासित प्रदेश के लोगों को ‘‘कॉरपोरेट हितों और हिंदुवादी राजनीति’’ का गुलाम बनाने की कोशिश के खिलाफ कड़ी आवाज उठाई जानी चाहिए।

विजयन ने कहा कि यह सुनिश्चित करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि केंद्रशासित प्रदेश और उसके मूल निवासियों की विशिष्टता को संरक्षित रखा जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासक इसे चुनौती दे रहे हैं और उन्हें उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाना चाहिए।

विपक्षी कांग्रेस के नेता वी डी सतीशन ने प्रस्ताव का समर्थन किया।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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