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युवा डॉक्टरों को राहत, नीट-सुपर स्पेशलिटी परीक्षाओं में बदलाव अगले साल से होंगे लागू

By भाषा | Updated: October 6, 2021 19:40 IST

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नयी दिल्ली, छह अक्टूबर विशेषज्ञता पाठ्यक्रमों की तैयारी में लगे हजारों युवा डॉक्टरों को राहत देते हुए केंद्र ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को सूचिक किया कि विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए नीट-सुपर स्पेशलिटी परीक्षा के पैटर्न में किए गए बदलाव अब अकादमिक सत्र 2022-23 से लागू किए जाएंगे।

सरकार ने संकेत दिया कि वह 2021-22 शैक्षणिक सत्र की परीक्षा को कुछ महीने के लिए टाल सकती है क्योंकि समूची प्रक्रिया की शुरुआत नए सिरे से करनी होगी।

शीर्ष अदालत उन 41 स्नातकोत्तर चिकित्सकों और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने 13 और 14 नवंबर को होने वाली परीक्षा के लिए 23 जुलाई को अधिसूचना जारी होने के बाद पाठ्यक्रम में अंतिम क्षणों में किए गए बदलाव को चुनौती दी थी।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमू्र्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्न की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की दलीलों को रिकॉर्ड में रखा और नीट-सुपर स्पेशलिटी के परीक्षा पैटर्न में बदलावों को इस वर्ष से लागू करने के केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं का निस्तारण कर दिया।

भाटी ने कहा, ‘‘छात्रों के हित में, जिन्होंने पुरानी व्यवस्था के अनुसार तैयारी की है, सरकार ने दो विशेषज्ञ इकाइयों (राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग) और राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड के साथ विमर्श कर निर्णय किया है कि नीट-सुपरस्पेशलिटी की संशोधित योजना 2022 से क्रियान्वित की जाएगी।’’

संक्षिप्त सुनवाई के दौरान भाटी ने कहा कि वह शीर्ष अदालत द्वारा मंगलवार को व्यक्त की गई आशंका को दूर करना चाहती हैं।

पीठ ने इस पर भाटी से कहा कि वह यह मुद्दा उस पर छोड़ दें।

भाटी ने कहा कि अधिकारियों को नवंबर में होने वाली परीक्षा को कुछ महीने के लिए टालने की जरूरत हो सकती है क्योंकि अब समूची प्रक्रिया को बदले जाने की आवश्यकता है।

पीठ ने कहा कि सरकार ने बहुत अच्छी तरह काम किया है और परीक्षा कब कराई जाए, यह अधिकारियों पर निर्भर है, लेकिन निश्चित तौर पर इस साल।

मंगलवार को, शीर्ष अदालत ने केंद्र को “अपने तरीके में सुधार” लाने का और नीट-सुपर स्पेशलिटी परीक्षा 2021 में किए गए बदलावों को वापस लेने पर निर्णय लेने का केंद्र को आखिरी मौका दिया था।

शीर्ष अदालत ने कहा था कि चिकित्सा पेशा और शिक्षा एक व्यवसाय बन गया है, तथा अब, चिकित्सा शिक्षा का नियमन भी उस तरह से हो गया है जो देश की त्रासदी है।

जुलाई में परीक्षा के लिए अधिसूचना जारी होने के बाद अंतिम समय में बदलाव करने के लिए केंद्र, राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (एनबीई) और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) द्वारा दी गई दलील से शीर्ष अदालत संतुष्ट नहीं थी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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