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अयोध्या रामजन्मभूमि विवाद: सुप्रीम कोर्ट का फैसला, 31 जुलाई तक रिपोर्ट दे मध्यस्थता समिति, 2 अगस्त से शुरू होगी सुनवाई

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: July 18, 2019 10:48 IST

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में मध्यस्थता की प्रगति पर रिपोर्ट मांगी थी। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 11 जुलाई को इस मुद्दे पर रिपोर्ट मांगी थी और कहा था कि अगर अदालत मध्यस्थता कार्यवाही पूरी करने का फैसला करती है तो 25 जुलाई से रोजाना आधार पर सुनवाई शुरू हो सकती है।

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ठळक मुद्देकोर्ट इस मामले में सभी याचिकाओं पर सुनवाई 2 अगस्त से शुरू करेगा। शीर्ष कोर्ट ने मध्यस्थता समिति को 31 जुलाई तक रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है।

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष कोर्ट ने मध्यस्थता समिति को 31 जुलाई तक रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। कोर्ट इस मामले में सभी याचिकाओं पर सुनवाई 2 अगस्त से शुरू करेगा।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में मध्यस्थता की प्रगति पर रिपोर्ट मांगी थी। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 11 जुलाई को इस मुद्दे पर रिपोर्ट मांगी थी और कहा था कि अगर अदालत मध्यस्थता कार्यवाही पूरी करने का फैसला करती है तो 25 जुलाई से रोजाना आधार पर सुनवाई शुरू हो सकती है।

पीठ ने तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति के अध्यक्ष और शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) एफ एम आई कलीफुल्ला से अब तक हुई प्रगति और मौजूदा स्थिति के बारे में 18 जुलाई तक उसे अवगत कराने को कहा था। पीठ ने 11 जुलाई को कहा था, ‘‘कथित रिपोर्ट 18 जुलाई को प्राप्त करना सुविधाजनक होगा जिस दिन यह अदालत आगे के आदेश जारी करेगी।’’ समिति में आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पांचू भी शामिल हैं। 

पीठ में न्यायमूर्ति एस एस बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस ए नजीर भी शामिल हैं। पीठ ने मूल वादियों में शामिल गोपाल सिंह विशारद के एक कानूनी उत्तराधिकारी द्वारा दाखिल आवेदन पर सुनवाई करते हुए आदेश जारी किया। आवेदन में विवाद पर न्यायिक फैसले की और मध्यस्थता प्रक्रिया समाप्त करने की मांग की गयी थी। आरोप लगाया गया था कि इस मामले में ज्यादा कुछ नहीं हो रहा।

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