Rajya Sabha Election 2022: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सत्ताधारी दल जदयू के अंदरखाने काफी हलचल है. केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह को तीसरी बार राज्यसभा भेजे जाने को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है.
जदयू के वरिष्ठ नेताओं, विधायकों और मंत्रियों ने नीतीश कुमार को उम्मीदवार चयन का अधिकार दे दिया है. इसके बाद आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा उम्मीदवार की घोषणा को लेकर मुंह खोला है. मीडिया से बात करते हुए नीतीश कुमार ने कहा आप लोग परेशान मत होइए. समय आने पर सब पता चल जाएगा.
उम्मीवार की घोषणा इतना पहले करने की क्या जरूरत है. मुख्यमंत्री ने इस सवाल पर वैसे तो हल्के अंदाज में जवाब देकर माहौल को हल्का करने की जरूर कोशिश की, लेकिन हकीकत यही है कि इस बार आरसीपी सिंह को लेकर सीएम सहज नहीं है. खबर है कि उनका पत्ता साफ हो सकता है.
वहीं, उनसे जब यह पूछा गया कि राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के ठिकानों पर सीबीआई की छापेमारी को विपक्ष राजनीतिक बदला बता रहा है? तो मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके बारे में हम क्या कहें? यह तो जो कर रहा है वह ही बताएगा. मुझे कोई जानकारी नहीं है. जो छापेमारी कर रहा है, वही बतायेगा कि क्या बात है.
वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने का निर्णय सराहनीय है. हालांकि बिहार में पट्रोल-डीजल पर राज्य सरकार द्वारा टैक्स कम करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस पर बात करके निर्णय होगा. उन्होंने कहा कि टैक्स करने पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है.
इस मुद्दे पर हमलोग आपस में बात करेंगे और उसके बाद निर्णय लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि पहले भी हमारी सरकार ने राहत दी थी. इस बार भी हमलोग बात करके जो फैसला होगा, उसके बारे में जानकारी देंगे. बता दें कि लालू पर लोगों से जमीन लेकर रेलवे में नौकरी देने का आरोप सबसे पहले जदयू ने ही लगाया था.
2008 में ही जदयू के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष ललन सिंह और राष्ट्रीय प्रवक्ता शिवानंद तिवारी ने बकायदा जदयू कार्यालय में पत्रकार वार्ता कर लालू यादव पर जमीन लेकर नौकरी देने का आरोप लगाया था. उसमें जदयू के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष ललन सिंह ने कई जमीनों का कागजात भी मीडिया के सामने पेश किया था.
इन जमीनों की रजिस्ट्री लालू प्रसाद यादव के परिजनों के नाम पर की गई थी. भाजपा नेता सुशील मोदी भी कह रहे हैं कि ललन सिंह और शिवानंद तिवारी ने उस वक्त के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ज्ञापन देकर तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद के खिलाफ जांच कराने तक की मांग की थी.