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राजीव चंद्रशेखर, नारायणस्वामी, करंदलजे को केंद्रीय कैबिनेट में मिली जगह

By भाषा | Updated: July 7, 2021 23:20 IST

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बेंगलुरु, सात जुलाई कर्नाटक के प्रौद्योगिकी उद्यमी राजीव चंद्रशेखर, दलित नेता ए नारायणस्वामी और शोभा करंदलजे को बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट में जगह मिली।

राजीव चंद्रशेखर: प्रौद्योगिकी उद्यमी और कर्नाटक से भाजपा के राज्यसभा सदस्य राजीव चंद्रशेखर ने शहरी शासन तथा भूतपूर्व सैनिकों और सशस्त्र बलों के मुद्दों जैसे क्षेत्रों पर काम किया है।

चंद्रशेखर का उच्च सदन में तीसरा कार्यकाल है। वायुसेना के एक पूर्व अधिकारी के 57 वर्षीय पुत्र चंद्रशेखर ने 2006 में राजनीति में प्रवेश किया था। पिछले दो कार्यकालों में, वह निर्दलीय थे।

चंद्रशेखर ने 1994 में बीपीएल मोबाइल की स्थापना की थी। हालांकि, वह 2005 में सेलुलर क्षेत्र से बाहर हो गए, उस समय बीपीएल का मूल्य 1.1 अरब अमरीकी डॉलर था। 2005 में उन्होंने एक निवेश और वित्तीय सेवा फर्म जुपिटर कैपिटल की स्थापना की।

चंद्रशेखर ने 2008-09 में उद्योग मंडल फिक्की के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

31 मई 1964 को जन्मे चंद्रशेखर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक हैं जबकि उन्होंने शिकागो के इलिनोइस इस्टीट्यूट आफ शिकागो से कंप्यूटर विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री ली है।

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ए नारायणस्वामी: पहली बार सांसद बने नारायणस्वामी को उनके निर्वाचन क्षेत्र के एक गांव में दलित होने के कारण प्रवेश से वंचित कर दिया गया था, उन्हें बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिली।

वह चित्रदुर्ग (सु) निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सांसद हैं। वह दलित समुदाय के मडिगा जाति से आते हैं और अनेकल क्षेत्र से चार बार- 1998, 1999, 2004 और 2008 में विधायक रह चुके हैं।

नारायणस्वामी 1998-1999 में कर्नाटक विधानसभा में भाजपा विधायक दल के मुख्य सचेतक के रूप में भी काम कर चुके हैं और 2010 से 2013 तक भाजपा सरकार में मंत्री थे।

नारायणस्वामी को भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी एल संतोष का करीबी माना जाता है।

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शोभा करंदलजे: एक मुखर राजनेता हैं जो ऐसे मुद्दों पर बोलने से नहीं चूकती जिनके बारे में वे मानती हैं कि उन्हें दृढ़ता से बोलना चाहिए। शोभा करंदलजे को किसी समय राज्य के वरिष्ठ भाजपा नेता और मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा का करीबी माना जाता था। उन्हें बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में जगह मिली।

उडुपी-चिकमगलूर से दो बार की लोकसभा सांसद हैं, वह प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष भी हैं। आरएसएस पृष्ठभूमि के साथ, वह पार्टी में विभिन्न पदों पर रही हैं।

संयोग से, करंदलजे दक्षिणी कर्नाटक में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली वोक्कालिगा समुदाय से आती हैं, जिससे आज केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने वाले सदानंद गौड़ा भी संबंधित हैं।

23 अक्टूबर, 1966 को दक्षिण कन्नड़ जिले के पुत्तूर में जन्मी करंदलजे की शैक्षणिक योग्यता में एमए (समाजशास्त्र) और मास्टर ऑफ सोशल वर्क शामिल हैं। वह अविवाहित हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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