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अयोध्या फैसला: यूपी में अलीगढ़, राजस्थान में भरतपुर में मोबाइल इंटरेनट सेवाओं पर लगी रोक

By अभिषेक पाण्डेय | Updated: November 9, 2019 08:03 IST

Bharatpur: अयोध्या पर आने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले राजस्थान सरकार ने भरतपुर में रविवार सुबह 6 बजे तक मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगाई

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अयोध्या के राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद जमीन विवाद पर शनिवार को आने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखते हुए समूचे उत्तर प्रदेश में धारा 144 लागू कर दी गई है।

राज्य में अलीगढ़ जिले में शुक्रवार मध्यरात्रि से ही अगले 24 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी गई है। 

वहीं राजस्थान सरकार ने भी ऐहतियातन भरतपुर में कल सुबह 6 बजे तक मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी है।    

सुप्रीम कोर्ट शनिवार को सुनाएगा फैसला

अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले पर सुप्रीम कोर्ट आज (शनिवार, 9 नवंबर) सुबह 10.30 बजे अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार रात 9 बजे बताया था कि वह इस मामले पर शनिवार को अपना फैसला सुनाएगा। इस मामले की 40 दिन की मैराथन सुनवाई के बाद 16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। 

 

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस धनंजय वाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पांच सदस्यीय संविधान पीठ इस मामले पर आज सुबह 10.30 बजे फैसला सुनाएगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले इस पर जारी करीब पिछले 70 वर्षों के विवाद का भी पटाक्षेप हो जाएगा। 

ये विवाद अयोध्या की 2.77 एकड़ जमीन के लिए है, जिस पर हिंदू पक्ष राम जन्म भूमि होने का दावा करते रहे हैं, जबकि मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वहां हमेशा से बाबरी मस्जिद थी। 

अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिज भूमि विवाद मामले पर सुप्रीम कोर्ट आज (शनिवार, 9 नवंबर) सुबह 10.30 बजे अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाएगा। इस मामले की 40 दिन की मैराथन सुनवाई के बाद 16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।  

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस धनंजय वाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पांच सदस्यीय संविधान पीठ इस मामले पर आज सुबह 10.30 बजे फैसला सुनाएगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले इस पर जारी करीब पिछले 500 वर्षों के विवाद का भी पटाक्षेप हो जाएगा। 

2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अयोध्या मामले पर फैसला सुनाते हुए 2.77 एकड़ जमीन को तीन पक्षों, रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड के बीच बांटने का फैसला सुनाया था। हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

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