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रेलवे स्टेशन पर खुशवंत सिंह के नोबेल 'औरतें, सेक्स, लव और लस्ट' देखकर भड़के अफसर, कहा- यहां से इन्हें फटाक से हटाओ

By रामदीप मिश्रा | Updated: November 21, 2019 13:13 IST

भोपाल रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का निरीक्षण करने के दौरान रमेश चंद्र रत्न ने बुक स्टॉल पर लेखक खुशवंत सिंह के उपन्यास के अलावा कुछ और पुस्तकों की बिक्री पर आपत्ति प्रकट की और स्टॉल संचालक को चेतावनी दी। 

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ठळक मुद्देरेलवे बोर्ड की यात्री सेवा समिति (PSC) के अध्यक्ष रमेश चंद्र रत्न ने बुधवार को भोपाल रेलवे स्टेशन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पूरे स्टेशन का निरीक्षण किया। प्रसिद्ध लेखक खुशवंत सिंह के उपन्यास 'औरतें, सेक्स, लव और लस्ट' को बुक स्टॉल से हटाने के लिए कहा गया है।

रेलवे बोर्ड की यात्री सेवा समिति (PSC) के अध्यक्ष रमेश चंद्र रत्न ने बुधवार को भोपाल रेलवे स्टेशन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पूरे स्टेशन का निरीक्षण किया। इसी बीच उन्हें एक बुक स्टॉल पर प्रसिद्ध लेखक खुशवंत सिंह के उपन्यास 'औरतें, सेक्स, लव और लस्ट' दिखाई दिए, जिन्हें उन्होंने अश्लील बताते हुए बुक स्टॉल से हटाने के निर्देश दे दिए।

भोपाल रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का निरीक्षण करने के दौरान रमेश चंद्र रत्न ने बुक स्टॉल पर लेखक खुशवंत सिंह के उपन्यास के अलावा कुछ और पुस्तकों की बिक्री पर आपत्ति प्रकट की और स्टॉल संचालक को चेतावनी दी। 

इस दौरान वहां मौजूद संवाददाताओं से उन्होंने कहा कि अधिकारियों को भी इसके लिए सचेत किया गया और निर्देशित किया है कि अश्लील चीजें किसी बुक स्टॉल पर नहीं मिलने दें। हम कोई चीज ऐसी नहीं चलने देना चाहते हैं जिससे नई पीढ़ी को कोई आघात पहुंचे। रतन ने बुक स्टॉल मालिक को चेतावनी भी दी कि अगर भविष्य में इस तरह के साहित्य को बिक्री पर रखा गया तो जुर्माना लगाया जाएगा।

उन्होंने स्टेशन पर संवाददाताओं से कहा कि यह एक बहुउद्देश्यीय स्टाल है इसलिए इस तरह के शब्दों के साथ अश्लील चीजें प्रदर्शित नहीं की जानी चाहिए। यह पूछे जाने पर कि इनमें से एक पुस्तक एक प्रसिद्ध लेखक की है। इस पर उन्होंने कहा कि जो भी लेखक हो नियम के अनुसार यह रेलवे स्टेशन पर स्वीकार्य नहीं है। बुक स्टॉल एक प्रणाली के तहत चलता है।

आपको बता दें कि दो महीने पहले नई दिल्ली स्टेशन पर एक निरीक्षण के दौरान अधिकारी ने चेतन भगत के उपन्यास 'हाफ ए गर्लफ्रेंड' पर भी आपत्ति जताई थी, जो इसी तरह के बुक स्टाल पर बिक्री के लिए रखा गया था।उनका बयान आने के बाद सवाल खड़ा हो गया है कि क्या पीएससी के रूप में नियुक्त एक राजनीतिक लोग अपनी व्यक्तिगत पसंद या नापसंद पर किसी भी पुस्तक की बिक्री को रोक सकता हैं?

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