Pulwama terror attack anniversary: पुलवामा हमले की बरसी, 40 शहीदों को नमन कर रहा देश, कश्मीर में शांति ही शांति?
By सुरेश एस डुग्गर | Updated: February 14, 2026 12:21 IST2026-02-14T12:20:37+5:302026-02-14T12:21:51+5:30
Pulwama terror attack anniversary: यह बात अलग है कि जम्मू कश्मीर में सुरक्षाबल अब तक कितने मानव बमों के हमलों को सहन कर चुके हैं अब किसी को याद नहीं है।

Pulwama terror attack anniversary
Pulwama: कश्मीर में ऐसा पहली बार हुआ है कि 9 और 11 फरवरी के दिन शांति से और बिना किसी आह्वान के गुजरे हैं। कोई अप्रिय घटना नहीं हुई और न ही हड़ताल का कोई आह्वान कहीं से हुआ। नौ फरवरी को संसद की इमारत पर हमले के दोषी करार देकर फांसी पर लटकाए गए अफजल गुरू की बरसी थी तथा 11 फरवरी को मकबूल बट की बरसी। इतना जरूर था कि आज 14 फरवरी का दिन शांति से गुजरने के बाद सुरक्षाधिकारियों ने राहत की सांस ली है। जानकारी के लिए वर्ष 2019 में पुलवामा में एक मानव बम ने केरिपुब जवानों से भरी यात्री बस को विस्फोट से उड़ा 50 के करीब जवानों की जान ले ली थी। भारतीय संसद पर हुए हमले के दोषी मुहम्मद अफजल गुरु को फांसी देने के 13 साल पूरे होने पर कश्मीर में 9 फरवरी को इस बार कहीं कोई तनाव नजर नहीं आया था।
#WATCH | J&K: A wreath-laying ceremony held at Lethpora in Pulwama, paying tribute to 40 CRPF personnel who lost their lives in 2019 Pulwama terror attack. Senior officials of the CRPF, civil administration, and security forces paid tributes to the jawans. pic.twitter.com/hhyg4moyaN
— ANI (@ANI) February 14, 2026
क्योंकि कहीं से किसी आतंकी या अलगाववादी गुट की ओर से कोई आह्वान ही नहीं था। अफजल गुरु को नौ फरवरी 2013 को दिल्ली के तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई थी। जबकि 11 फरवरी को जेकेएलएफ के नेता मकबूल बट की 42वीं बरसी पर भी कश्मीर में ऐसा ही शांति का माहौल देखा गया। हालांकि 9, 11 और 14 फरवरी के दिनों पर सभी को अधिकतम सतर्कता बरतने की ताकीद की गई थी।
पर किसी के चेहरे पर कोई कोई शिकन नहीं थी। यही नहीं पुलवामा हमले की छठी बरसी से ठीक एक दिन पहले खुफिया अधिकारियों ने यह दावा जरूर किया था कि कश्मीर में 60 से 65 आतंकी अभी भी एक्टिव हैं जिनमें आधे से अधिक विदेशी हैं। हालांकि उन्होंने इस पर खुशी जरूर व्यक्त की थी कि श्रीनगर में अब बस एक ही आतंकी बचा है।
इतना जरूर था कि वर्ष 2019 में आज ही के दिन पुलवामा में हुए सबसे बड़े आत्मघाती मानव बम हमले का दर्द आज भी सुरक्षाबलों को साल रहा है। कारण स्पष्ट है कि इस हमले के लिए जिन 19 आतंकियों को दोषी माना गया था उनमें से चार आज भी खुल्ला घूम रहे हैं। अर्थात वे जीवित हैं जिनमें से तीन पाकिस्तानी हैं और एक कश्मीरी है।
इस हमले में शामिल 19 आतंकियों में से 8 मारे गए हैं, 7 गिरफ्तार किए गए हैं और 3 पाकिस्तानियों सहित 4 अभी भी जीवित हैं और कश्मीर में फैले आतंकवाद के सालों में मानव बम कश्मीर में तैनात सुरक्षाबलों के लिए खतरे के तौर पर ही निरूपित किए जाते रहे हैं।
यह कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं है कि पुलवामा हमले ने मानव बमों के इस्तेमाल को इस हालात तक पहुंचा दिया था कि अभी तक इसका कोई तोड़ सुरक्षाधिकारी तलाश नहीं कर पाए हैं। अब तक कश्मीर में मानव बमों के बारे में तो कई बार चेतावनी दी जाती थी पर अब पुलिस ऐसे खतरों को नहीं मानती हैं।
यह बात अलग है कि जम्मू कश्मीर में सुरक्षाबल अब तक कितने मानव बमों के हमलों को सहन कर चुके हैं अब किसी को याद नहीं है। कश्मीर में जो सर्वप्रथम दो मानव बम हमले हुए थे उनमें एक वर्ष 2000 की 25 दिसम्बर को हुआ था इसमें हमलावर मानव बम समेत 11 लोगों की मौत हो गई थी तो पहला भी इसी साल 19 अप्रैल को हुआ था। तब मानव बम अकेला ही मारा गया था। ताजा मानव बम हमला पुलवामा में पिछले साल 14 फरवरी को हुआ इसमें 50 से अधिक सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। इसे स्थानीय कश्मीरी ने अंजाम दिया था।