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प्रधानमंत्री ने लोगों से कृषि सुधारों को रेखांकित करती पुस्तिका पढ़ने का आग्रह किया

By भाषा | Updated: December 19, 2020 22:56 IST

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नयी दिल्ली, 19 दिसंबर केन्द्र सरकार और किसानों के बीच गतिरोध जारी रहने के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को लोगों से कृषि सुधारों को रेखांकित करती अपनी सरकार द्वारा जारी की गई ई-पुस्तिका पढ़ने और उसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का आग्रह किया।

सरकार ने अंग्रेजी और हिंदी में ई-पुस्तिका जारी की है जो सितंबर में लागू किए गए सुधारों से फायदा उठाने वाले किसानों की सफलता को रेखांकित करती है।

प्रधानमंत्री ने पुस्तिका के हिंदी संस्करण के पृष्ठों की तस्वीरें ट्विटर पर साझा करते हुए लिखा, ''इस पुस्तिका में ग्राफिक्स और बुकलेट समेत ढेर सारी चीजें हैं, जिनके जरिये यह समझाया गया है कि हाल ही में लाए गए कृषि सुधार हमारे किसानों के लिए किस प्रकार लाभकारी हैं। ये नमो ऐप के वॉलंटियर मॉड्यूल के यॉर वॉइस और डाउनलोड सेक्शन में मिल सकते हैं। इसे पढ़ें और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं।''

बाद में, उन्होंने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा किसानों को लिखे गए खुले पत्र के अंग्रेजी संस्करण को भी टैग किया और उसे पढ़ने को कहा।

मोदी ने कहा कि पत्र में कृषि सुधारों से संबंधित विभिन्न पहलुओं के साथ ही यह भी विस्तार से बताया गया है कि यह किस प्रकार किसानों को फायदा पहुंचाएगा।

तोमर ने बृहस्पतिवार को किसानों को आठ पृष्ठों का एक खुला पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने कहा कि मोदी सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही उन्होंने जोर दिया कि नए कृषि कानूनों का मकसद छोटे और सीमांत किसानों को लाभ पहुंचाना है।

गौरतलब है कि हजारों किसान कृषक (सशक्‍तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्‍वासन और कृषि सेवा पर करार अधिनियम, 2020, कृषक उपज व्‍यापार और वाणिज्‍य (संवर्धन और सरलीकरण) अधिनियम, 2020, और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम 2020 के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

तीन केन्द्रीय मंत्रियों और 40 किसान यूनियनों के बीच अब तक कम से कम पांच दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका है।

किसान संगठन केंद्रीय कानूनों को पूरी तरह से वापस लेने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे किसानों को आशंका है कि नए कृषि कानूनों से न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था के साथ ही मंडी प्रणाली समाप्त हो जाएगी।

पिछले हफ्ते केंद्र ने इन यूनियनों को प्रस्ताव भेजा था जिसमें कहा गया था कि वह लिखित आश्वासन देगी कि न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली बनी रहेगी और किसानों की अन्य प्रमुख चिंताओं का भी निवारण करेगी। लेकिन इसके बाद भी गतिरोध दूर नहीं हो सका।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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