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प्रधानमंत्री पीछे हटे, राज्यों पर डाली जिम्मेदारी: कांग्रेस

By भाषा | Updated: April 20, 2021 22:51 IST

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नयी दिल्ली, 20 अप्रैल कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को ‘खोखला’ करार देते हुए मंगलवार को आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया और सारी जिम्मेदारी राज्यों पर डाल दी।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कटाक्ष करते हुए कहा कि मोदी के ‘ज्ञान’ का सार यह था कि उनके बस का कुछ नहीं है और लोग अपनी जान की रक्षा खुद करें।

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘आज रात 8.45 बजे के ज्ञान का सार -:मेरे बस का कुछ नही,यात्री अपने सामान यानी जान की रक्षा स्वयं करें।”

कांग्रेस महासचिव अजय माकन ने एक बयान में कहा, ‘‘राष्ट्र के नाम प्रधानमंत्री का संबोधन फिर से खोखली बात ही रहा। देश अप्रत्याशित और गंभीर संकट का सामना कर रहा है...इतने लोगों की मौत हो रही है कि श्मशानों और कब्रस्तानों में जगह नहीं बची है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री से उम्मीद थी कि वह यह बताएंगे कि उनकी सरकार ने अस्पतालों में बिस्तर बढ़ाने, ऑक्सीजन की आपूर्ति और जरूरी दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए क्या किया है।बहरहाल, उन्होंने अपनी सारी जिम्मेदारियों से पीछे हटने और भारत को बचाने का दायित्व गैर सरकाराी संगठनों, युवाओं और बाल मित्रों को सौंपने का चुनाव किया।’’

माकन ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने राज्यों से लॉकडाउन नहीं लगाने की सलाह देते हुए अपनी जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर डाल दी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री के भाषण का सार यह है: लोगों की अपनी जिम्मेदारी खुद की है। अगर आप इससे पार पा लेते हैं तो किसी उत्सव और महोत्सव में जरूर मिलेंगे। तब तक के लिए शुभकामनाएं। ईश्वर आपकी रक्षा करे।’’

प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को कहा कि कोरोना की दूसरी लहर ‘‘तूफान’’ बनकर आई है। हालांकि उन्होंने राज्यों को यह भी सलाह दी कि कोरोना से मुकाबले के लिए लॉकडाउन का इस्तेमाल ‘‘अंतिम विकल्प’’ के रूप में किया जाए।

राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की संभावना को खारिज किया और राज्यों को भी इससे बचने की सलाह दी।

कोरोना से लड़ते-लड़ते अपनी जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘कोरोना के खिलाफ देश आज एक बहुत बड़ी लड़ाई लड़ रहा है। कुछ सप्ताह पहले तक स्थितियां संभली हुई थी और फिर यह कोरोना की दूसरी लहर तूफान बन कर आ गई है। जो पीड़ा आपने सही है या जो पीड़ा आप सह रहे हैं उसका मुझे पूरा अहसास है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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