भारत बायोटेक के आश्वासन के बाद ही टीकाकरण की तैयारी की : दिल्ली सरकार ने उच्च न्यायालय से कहा
By भाषा | Updated: June 4, 2021 22:13 IST2021-06-04T22:13:25+5:302021-06-04T22:13:25+5:30

भारत बायोटेक के आश्वासन के बाद ही टीकाकरण की तैयारी की : दिल्ली सरकार ने उच्च न्यायालय से कहा
नयी दिल्ली, चार जून दिल्ली सरकार ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि उसने कोवैक्सिन से लोगों के टीकाकरण की तैयारी इसके निर्माता भारत बायोटेक के आश्वासन के आधार पर की।
दिल्ली सरकार के मुताबिक भारत बायोटेक ने राष्ट्रीय राजधानी को मई में पांच लाख खुराक और जून में इसके चार गुना खुराक की आपूर्ति करने का भरोसा दिया था।
दिल्ली सरकार के स्थायी अतिरिक्त अधिवक्ता अनुज अग्रवाल ने अदालत में कहा कि हालांकि, मई में केवल 1.5 लाख खुराक ही मिली और केंद्र के निर्देश की वजह से दूसरी खुराक के लिए अलग से टीके का भंडार नहीं रखा गया, सभी खुराक 18 से 44 वर्ष आयुवर्ग के लोगों को पहली खुराक देने में इस्तेमाल की गई।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने दिल्ली सरकार द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद कहा कि 11-12 मई को जब एहसास हुआ कि भारत बायोटेक से दूसरी खुराक के लिए और टीके की आपूर्ति नहीं होगी तब लोगों को कोवैक्सिन की पहली खुराक देनी बंद कर देनी चाहिए थी।
अदालत ने कहा कि दिल्ली सरकार ‘ अति आत्मविश्वास’ में थी कि उसे उसके अनुरोध के मुताबिक टीके की खुराक मिल जाएगी।
अदालत ने कहा कि अगर भारत बायोटेक से अतिरिक्त खुराक की आपूर्ति की पुष्टि नहीं हुई थी तब मौजूदा स्थिति- जिसमें हजारों लोगों को पहली खुराक के छह हफ्ते के भीतर दूसरी खुराक संभवत: नहीं मिले- आपके अपने कार्यों से उत्पन्न हुई।
अदालत ने कहा, ‘‘ 11-12 मई के बाद आपको (दिल्ली सरकार) रोक देना चाहिए था लेकिन आप 24 मई तक टीकारकरण करते रहे।’’
अग्रवाल ने बताया कि नौ जून के करीब भारत बायोटेक कोवैक्सिन की 15 हजार खुराक भेजेगी और दो जुलाई को 90 हजार अतिरिक्त खुराक की आपूर्ति करेगी।
अदालत ने कहा कि आपूर्ति की पहली खेप से 1.5 लाख लोगों में से केवल 10 प्रतिशत को मदद मिलेगी जिन्हें पहली खुराक दी जा चुकी है और आपूर्ति के समय दूसरी खुराक देने का समय होगा, इससे बहुत मदद नहीं मिलेगी।
अदालत ने कहा, ‘‘लोगों ने टीके की पहली खुराक इस विश्वास से ली कि आप दूसरी खुराक भी मुहैया कराएंगे।’’
दिल्ली उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई सात जून को सूचीबद्ध करने के साथ दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह केंद्र और भारत बायोटेक से हुए संवाद के दस्तावेज अदालत के रिकॉर्ड पर लाए।
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