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बांग्ला लेखक अनीश देव का निधन, कोरोना वायरस ने ली जान, निजी अस्पताल में थे भर्ती

By भाषा | Updated: April 28, 2021 14:48 IST

लोकप्रिय बांग्ला लेखक अनीश देव को पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा शुरू किए गए विद्यासागर पुरस्कार से 2019 में सम्मानित किया गया था।

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ठळक मुद्देदेव ने सुबह सात बजकर 10 मिनट पर दम तोड़ दिया। 1951 में जन्मे देब ने 18 साल की उम्र में लिखना शुरू कर दिया था। देब को दुनिया भर के विज्ञान उपन्यासों का बांग्ला में लिप्यंतरण और विज्ञान को प्रसिद्ध करने के लिए भी जाना जाता है।

कोलकाताः लोकप्रिय बांग्ला लेखक अनीश देव का निधन कोविड-19 के कारण बुधवार को शहर के एक अस्पताल में हो गया। परिवार के सूत्रों ने बताया कि देव को जीवनरक्षक प्रणाली पर रखा गया था।

वह 70 वर्ष के थे। उनके परिवार में पत्नी और उनकी बेटी है। लेखक को कुछ दिन पहले घर पर दिल का दौरा पड़ने के बाद निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उनमें कोविड-19 की पुष्टि हुई थी। देव ने सुबह सात बजकर 10 मिनट पर दम तोड़ दिया। महानगर में 1951 में जन्मे देब ने 18 साल की उम्र में लिखना शुरू कर दिया था।

उनकी प्रसिद्ध कृतियों में भविष्यवादी थ्रिलर तीश घंटा शात मिनट, सापेर चोख, जिबोन जखोन फुराय जाए, हाते कलोमे कंप्यूटर, बिज्ञानेर दाशदिगांतो हैं। देब को दुनिया भर के विज्ञान उपन्यासों का बांग्ला में लिप्यंतरण और विज्ञान को प्रसिद्ध करने के लिए भी जाना जाता है। उन्हें पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा शुरू किए गए विद्यासागर पुरस्कार से 2019 में सम्मानित किया गया था।

दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक एन के भट्टाचार्य का निधन

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के पूर्व प्राध्यापक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता एन के भट्टाचार्य का निधन हो गया। एक बयान में यह जानकारी दी गई। यहां के एक नागरिक फोरम ‘जन हस्तक्षेप’ ने बताया कि वह संगठन के समन्वयक थे। ‘जन हस्तक्षेप’ द्वारा जारी बयान में कहा गया, “हमने एक महान मानवाधिकार कार्यकर्ता और एक बेहतरीन इंसान खो दिया।” ‘

इंडियन फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियन्स’ (इफ्टू) ने भट्टाचार्य को श्रद्धांजलि दी और उन्हें मानवाधिकार के योद्धा के तौर पर याद किया। इसने एक बयान में कहा कि भट्टाचार्य की सोमवार को यहां मौत हो गई और ऐसा पता चला है कि उनकी बेटी की तीन दिन पहले कोविड-19 से मौत हो गई थी। जन हस्तक्षेप ने अपने बयान में कहा, “वह उम्र के इस पड़ाव पर अपनी बेटी के जाने का दुख बर्दाश्त नहीं कर पाए।”

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