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हिरन मौत मामल में पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को नहीं मिली अग्रिम जमानत

By भाषा | Updated: March 13, 2021 18:49 IST

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मुंबई, 13 मार्च महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक सत्र अदालत ने मनसुख हिरन की मौत के मामले में पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को अंतरिम जमानत देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उनके विरूद्ध प्रथमदृष्टया सबूत और सामग्री है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस ताम्बे ने वाजे को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया और कहा कि हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ करने की जरूरत है। अदालत के इस आदेश की प्रति शनिवार को उपलब्ध करायी गयी।

आदेश में कहा गया है, ‘‘ यह अदालत आवेदक (वाजे) को अंतरिम जमानत देने के लिए सहमत नहीं है क्योंकि आवेदक के विरूद्ध प्रथमदृष्टया सबूत और सामग्री हैं। हिरासत में लेकर उससे पूछताछ करने की जरूरत है। ’’

वाजे ने अग्रिम जमानत के लिए शुक्रवार को याचिका दायर की थी।

वाजे के वकील ए एम कालेकर ने शुक्रवार को इस आधार पर अदालत से अपने मुवक्किल को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण देने का अनुरोध किया था कि वह जांच में सहयोग कर रहे हैं।

लेकिन अतिरिक्त सरकारी वकील विवेक काडू ने इस अनुरोध का विरोध किया और दलील दी कि इस मामले में जांच अहम पड़ाव पर है।

अंतरिम जमानत देने से इनकार करते हुए अदालत ने कहा कि इस मामले में आरोप भादंसं की धाराओं --302 (हत्या), 201 (सबूत नष्ट करना) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत हैं जो गंभीर अपराध हैं।

अदालत ने कहा, ‘‘इस अदालत ने पाया कि 27-28 फरवरी, 2021 को मनसुख हिरन मुम्बई में आवेदक के साथ थे।’’

उसने कहा कि हिरन की पत्नी ने अपनी शिकायत में वाजे का नाम लिया है।

अदालत ने कहा, ‘‘ सूचनाकर्ता (हिरन की पत्नी) ने प्राथमिकी में आवेदक के खिलाफ प्रत्यक्ष आरोप लगाये हैं। इसलिए यह अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि जांच शुरूआती चरण में है।’’

अदालत ने याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख 19 मार्च तय की है और महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के जांच अधिकारी को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। एटीएस इस मामले की जांच कर रहा है।

वाजे ने याचिका में कहा है कि हिरन की मौत के संबंध में एटीएस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी में किसी व्यक्ति के नाम का उल्लेख नहीं है।

वाजे ने प्राथमिकी को “निराधार और उद्देश्यहीन” बताया और कहा कि उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि जब हिरन लापता हुए थे और उनकी कथित रूप से हत्या की गयी थी, तब वह (वाजे) दक्षिणी मुंबई के डोंगरी इलाके में थे।

वाजे ने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा-438 के तहत ठाणे के जिला सत्र अदालत में याचिका दायर की है।

इस धारा के तहत कोई भी व्यक्ति किसी मामले में गिरफ्तारी की आशंका होने पर अग्रिम जमानत का अनुरोध कर सकता है।

वाजे ने याचिका में कहा कि हिरन की पत्नी की शिकायत खोखले शक पर आधारित है और निराधार है।

याचिका में कहा गया, “अपराध के संबंध में प्राथमिक सूचना देने वाले व्यक्ति के खोखले शक के आधार पर किसी नागरिक की गिरफ्तारी को जायज नहीं ठहराया जा सकता।”

उल्लेखनीय है कि हिरन की पत्नी ने वाजे पर उनके पति की संदिग्ध मौत में संलिप्त होने का आरोप लगाया है। वाजे को बुधवार को मुंबई अपराध शाखा से हटा दिया गया था।

वाजे की याचिका में कहा गया है कि उनके विरूद्ध अभियोजनयोग्य साक्ष्य नहीं है और इस मामले में उन्हें आरोपी के रूप में नामजद भी नहीं किया गया है।

याचिका में कहा गया है, “आवेदनकर्ता (वाजे) ठाणे में लंबे समय से रह रहा है। वह मृतक का ग्राहक या परिचित होता तब भी केवल प्राथमिकी के आधार पर उसका मकसद सिद्ध नहीं किया जा सकता।”

एटीएस ने इस सप्ताह की शुरुआत में वाजे का बयान दर्ज किया।

वाजे ने याचिका में कहा कि आठ मार्च को एटीएस के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनसे सघन पूछताछ की और तब उन्होंने कहा कि प्रासंगिक समय (जब हिरन की कथित रूप से हत्या की गयी) के दौरान वह दक्षिण मुम्बई में थे।

याचिका में कहा गया, “चार मार्च को पूरे दिन आवेदनकर्ता दक्षिण मुंबई में था। इसके बाद चार और पांच मार्च की दरम्यानी रात को आवेदनकर्ता को डोंगरी क्षेत्र में देखा गया। यह डोंगरी थाने की स्टेशन डायरी में दर्ज है जिससे कथित तथ्य का सत्यापन होता है।”

अपराध शाखा में सहायक पुलिस निरीक्षक रहे वाजे का तबादला मुंबई पुलिस की नागरिक सुविधा केंद्र शाखा में किया गया है।

इस बीच शनिवार को अपने व्हाट्सअप स्टेट्स मैसेज में वाजे ने लिखा, ‘‘ दुनिया को अलविदा कहने का समय नजदीक आ रहा है।’’

उसमें लिखा गया है, ‘‘ तीन मार्च, 2004 को सीआईडी के साथी अधिकारियों ने एक झूठे मामले में मुझे गिरफ्तार किया था। वह गिरफ्तारी अबतक बेनतीजा है। मुझे लग रहा है कि इतिहास दोहराया जा रहा है। मेरे साथी अधिकारी मुझे गलत ढंग से फंसाने की कोशिश में हैं। परिदृश्य में बस थोड़ा सा फर्क है। तब शायमद मेरे पास 17 सालों के लिए उम्मीद, धैर्य, जीवन और सेवा भी । अब मेरे पास न तो 17 साल की और जिंदगी न ही सेवा और न ही जिंदा रहने का धैर्य है। मैं सोचता हूं कि दुनिया को अलविदा कहने का समय नजदीक आ रहा है।’’

गौरतलब है कि उद्योगपति मुकेश अंबानी के दक्षिण मुंबई स्थित आवास के पास 25 फरवरी को विस्फोटक और धमकी भरे पत्र के साथ स्कॉर्पियो एसयूवी कार मिली थी।

हिरन ने दावा किया था कि कार उनकी है लेकिन घटना से एक हफ्ते पहले वह चोरी हो गई थी। इस मामले में उस समय पेंच आया जब हिरन पांच मार्च को ठाणे में एक नदी किनारे मृत पाए गए थे।

हिरन की पत्नी ने दावा किया कि उनके पति ने एसयूवी पिछले साल नवंबर में वाजे को दी थी और उन्होंने फरवरी के पहले हफ्ते में यह कार लौटाई थी। हालांकि, वाजे ने इससे इनकार किया है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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