प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने 'मन की बात' कार्यक्रम के जरिये देश को संबोधित कर रहे हैं। देश में फैली कोरोना महामारी से जारी जंग पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस लड़ाई में भारत का हर नागरिक सिपाही है। आज मन की बात का 64वां संस्करण प्रसारित हो रहा है। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए पीएम बोले, आप सब लॉकडाउन में मन की बात सुन रहे हैं। इस समय फोन कॉल और लोगों की बातें बड़ी संख्या में मुझ तक पहुंच रही हैं। कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा पढ़ पाऊं और सून पाऊं।
सावधानी हटी दुर्घटना घटी
मन की बात में पीएम मोदी ने कहा कि सभी दो गज की दूरी बनाए रखें और घर से बाहर न निकलें। उन्होंने कहा कि मैं आपसे आग्रह करूंगा कि हम कतई अति-आत्मविश्वास में न फंस जाएं, हम ऐसा विचार न पाल लें कि हमारे शहर में, हमारे गांव में, हमारी गली में, हमारे दफ्तर में अभी तक कोरोना नहीं पहुंचा है इसलिए अब पहुंचने वाला नहीं है। देखिए ऐसी गलती कभी मत पालना। दुनिया का अनुभव हमें बहुत कुछ कह रहा है और हमारे यहां तो बारंबार कहा जाता है- 'सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी'।
यह जनता की लड़ाई है
देश में जारी कोरोना के खिलाफ लड़ाई की चर्चा करते हुए पीएम ने कहा कि कई ऐसे पहलू जानने को मिले जिस पर आपाधापी में ध्यान ही नहीं जाता। भारत में कोरोना के खिलाफ लड़ाई जनता द्वारा लड़ी जा रही है। हम भाग्यशाली हैं कि देश का हर नागरिक इस लड़ाई का सिपाही है। आप कहीं भी नजर डालिए, अहसास हो जायेगा कि यह जनता की लड़ाई है। जब पूरा विश्व इस महामारी से जूझ रहा है। भविष्य में जब इसकी चर्चा होगी तो भारत की जनता का भी जिक्र जरूर होगा।
ताली-थाली, दीया मोमबत्ती से लोगों में भावनाएं जगीं
पीएम मोदी ने कहा कि ताली-थाली, दीया मोमबत्ती से लोगों में भावनाएं जगीं। शहर हो या गांव ऐसा लग रहा है जैसे देश में महायज्ञ चल रहा है जिसमें हर कोई योगदान देने को आतुर हैं। हमारे किसान भाई-बहन दिन रात खेतों में मेहनत कर रहे हैं और चिंता कर रहे हैं कि कोई भी भूखा न सोए। कोई तनख्वाह दान दे रहा है, कोई मास्क बना रहा है तो कोई खेत की सब्जियां दान दे रहा है। कोई जिस स्कूल में क्वारंटीन में हैं उसकी रंगाई-पुताई कर रहा है। यही भाव कोरोना के खिलाफ लड़ाई को ताकत दे रहा है। covidworriors.gov.in सरकार ने इस प्लैटफॉर्म के माध्यम से सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधी और स्थानीय प्रशासन को जोड़ दिया है। इसमें अब तक सवा करोड़ लोग जुड़ चुके हैं।
समाज को फ्रेश नजरिए से देखने का अवसर मिला
हमारे साथियों ने इतने कम समय में तीन लाख किलोमीटर की हवाई उड़ान भरी है और 500 टन मेडिकल सामग्री देश के कोने-कोने में पहुंची है। इसी तरह रेलवे के साथी भी दिन-रात काम कर रहे हैं। देशभर में चिकित्सा से जुड़े लोगों ने अध्यादेश पर संतोष व्यक्त किया है। इस अध्यादेश में चिकित्सा कर्मचारियों के खिलाफ हिंसा पर कड़ी सजा के प्रावधान किए गए हैं। हम अनुभव कर रहे हैं कि इस महामारी के दौरान समाज को फ्रेश नजरिए से देखने का अवसर मिला है। आज अपने जीवन से जुड़े हर व्यक्ति की महत्ता का असहसास हो रहा है।
डॉक्टर और पुलिस के प्रति लोगों का नजरिया बदला
पीएम ने कहा कि सोशल मीडिया पर हम देख रहे हैं कि लोग लॉकडाउन के दौरान अपने साथियों को याद कर रहे हैं, उनकी मदद भी कर रहे हैं और उनपर लिख रहे हैं। लोग सफाई कर्मचारियों पर पुष्पवर्षा कर रहे हैं। हमारे डॉक्टर और पुलिस व्यवस्था को लेकर आम लोगों की सोच में काफी बदलाव हुआ है। पहले पुलिस के बारे में सोचते ही नकारात्मकता के खिलाफ कुछ नजर नहीं आता था। आज हमारे पुलिस कर्मचारी लोगों तक खाना पहुंचा रहे हैं। हम अकसर प्रकृति, विकृति और संस्कृति के बारे में सुनते हैं। अगर मानव प्रकृति की बात करें तो यह मेरा है, मैं इसका उपयोग करता हूं.. यह बहुत स्वाभाविक है। लेकिन जो मेरा नहीं है उसे मैं दूसरे से छीन लेता हूं, हम इसे विकृति कह सकते हैं।
इससे ऊपर जब कोई अपने हक की चीज दूसरों की मदद करते हैं और खुद की चिंता छोड़कर अपने हिस्से को बांटकर दूसरों की जरूरत पूरी करता है वही तो संस्कृति है। आज भारत के आयुर्वेद को भी लोग विशिष्ट भाव से देख रहे हैं। कोरोना की दृष्टि से इम्युनिटी बढ़ाने के लिए जो प्रोटोकॉल दिया है मुझे विश्वास है कि आप इसका उपयोग कर रहे होंगे।