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ब्रिटेन से विमानों की आवाजाही बंद होने से कई लोगों की योजनाएं बिगड़ीं

By भाषा | Updated: December 22, 2020 20:52 IST

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(गुंजन शर्मा)

नयी दिल्ली, 22 दिसंबर ब्रिटेन में कोविड-19 के बेहद संक्रामक नए स्वरूप के सामने आने के बाद भारत द्वारा वहां से उड़ानों की आवाजाही बंद करने से बहुत से लोगों की योजनाएं गड़बड़ा गई हैं, खास तौर पर उन लोगों की जिन्हें नए साल से पहले घर लौटना था या फिर अपने लंबित शोधकार्यों के लिये वापस विश्वविद्यालय आना था।

इस साल के अंत तक उड़ानों के निलंबित रहने की नागर विमानन मंत्रालय ने सोमवार को घोषणा की थी। भारत के अलावा कनाडा समेत कई अन्य देशों ने भी ब्रिटेन से विमानों की आवाजाही पर रोक लगा दी है।

ब्रिटेन में आईटी पेशेवर अभिजीत डांग ने कहा, “मेरा परिवार यहां आया हुआ है और उन्हें क्रिसमस के बाद लौटना था। लेकिन अब उनकी योजना धूमिल नजर आती है।”

उन्होंने कहा कि पूरे साल लोगों ने इस डर से यात्रा नहीं की कि अचानक लॉकडाउन लगने की वजह से वे फंस जाएंगे। अभिजीत ने कहा, “हम अपनी यात्रा को टालते रहे, यह सोचकर कि हममें से कोई फंस जाएगा, लेकिन हाल में मेरे परिवार ने सफर का जोखिम उठाया और वे ब्रिटेन आ गए।”

भारत में एक निजी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर उनकी मां तरुणा डांग ने कहा, “मैं ब्रिटेन से ऑनलाइन कक्षाएं लेना जारी रखा सकती हूं लेकिन हमनें पूर्व में देखा है कि एक बार फंसने पर संघर्ष शुरू हो जाता है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि उड़ान सेवाएं जल्द शुरू हो जाएंगी।”

उनकी चिंताएं इस बात से और बढ़ गई हैं कि कोरोना वायरस के नए स्वरूप के सामने आने के बाद ब्रिटेन में स्थानीय स्तर पर लॉकडाउन के आदेश दिये जा रहे हैं।

दीपक त्रिपाठी की पत्नी जनवरी में मां बनने वाली हैं और उससे पहले काम पूरा करने के लिये एक हफ्ते के कारोबारी दौरे पर उत्तरी आयरलैंड के बेलफास्ट आए थे।

उन्होंने कहा, “हमें पिछले साल काफी नुकसान हुआ और मैं जानता था कि मुझे यहां (बेलफास्ट) फिर आने में समय लग जाएगा क्योंकि हम अपने पहले बच्चे के जन्म का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन अब, मैं यहां फंस गया हूं। मैं उम्मीद करता हूं कि मैं अपने बच्चे के जन्म से पहले वहां पहुंच जाऊंगा यद्यपि मेरे माता-पिता वहां हैं।”

करीब आठ महीनों तक इंतजार के बाद नताशा शर्मा दिसंबर के अंत में वापस ब्रिटेन जाने की तैयारी कर रही थीं जिससे वह जनवरी से अपने लंबित शोधकार्य को फिर से आगे बढ़ा पाएं लेकिन अब इस पर एक बार फिर विराम लग गया है।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “मैं मार्च में दो हफ्तों के लिये आई थी और यहां फंस गई। मैं ऑनलाइन अपना काम कर रही हूं और यह संभावना तलाश रही हूं कि कब और कैसे वापस जा सकती हूं।”

मैंने शुरुआती आशंकाओं को दूर कर, पृथकवास के नियमों और वंदे भारत उड़ानों के कार्यक्रम के बारे में जानकारी हासिल कर “दिसंबर के अंतिम हफ्ते में यात्रा की योजना बनाई थी लेकिन एक बार फिर इसपर विराम लग गया।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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