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लोगों ने वायरस के साथ रहना सीख लिया, नहीं होगा अर्थव्यवस्था पर खास असर: डी के जोशी

By भाषा | Updated: March 21, 2021 12:00 IST

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नयी दिल्ली, 21 मार्च कोरोना वायरस महामारी की नई लहर के चलते देश में एक बार फिर लॉकडाउन लगाए जाने की आशंका के बीच रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि लोगों ने वायरस के साथ रहना सीख लिया है और अब इस महामारी का अर्थव्यवस्था पर कोई खास असर नहीं होगा।

वायरस का प्रकोप बढ़ने की स्थिति में अर्थव्यवस्था पर इसके असर तथा सरकार की इस संकट से निपटने की तैयारी पर पेश हैं जोशी से ‘‘भाषा के पांच सवाल’’ और उनके जवाब :

सवाल - कोविड-19 महामारी के बाद अर्थव्यवस्था में तेजी से गिरावट हुई और फिर सुधार देखने को मिला। इस वक्त अर्थव्यवस्था की स्थिति कैसी है?

जवाब - अर्थव्यवस्था कोविड-19 के प्रकोप से बाहर निकल रही है। हालांकि छोटे कारोबारियों के लिए कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं और सरकार को इन्हें नीतिगत मदद जारी रखनी चाहिए। कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था की स्थिति बेहतर हो रही है। लोगों ने वायरस के साथ जीना सीख लिया है।

सवाल - कोरोना वायरस महामारी की दूसरी या तीसरी लहर की बात कही जा रही है। देश में रोजाना संक्रमण के मामले बढ़कर 40,000 से अधिक हो गए हैं। ऐसे में अगर दोबारा लॉकडाउन लगाया गया तो अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर होगा?

जवाब - आप अपने आसपास देखिए। कोरोना का डर कहीं है क्या? ये सही है कि बीते दिनों संक्रमण के मामले एक बार फिर तेजी से बढ़े हैं, लेकिन दूसरी ओर अब हमारे पास वायरस के बारे में अधिक जानकारी है, टीका लगना शुरू हो गया है। ... और सरकार ने भी वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए कई ठोस फैसले किए हैं। हम अब वायरस का मुकाबला करने के लिए कहीं अच्छी तरह तैयार हैं। अर्थव्यवस्था को जो भी उल्लेखनीय नुकसान होना था, हो चुका है। अब कोई खास असर नहीं होगा।

सवाल - फिर भी यदि कुछ कारोबार प्रभावित होते हैं, तो सरकार के पास राजकोषीय समर्थन या नीतिगत राहत देने की गुंजाइश कितनी है?

जवाब - सरकार के हाथ इस समय थोड़े तंग हैं, फिर अगर जरूरत पड़ेगी तो वह बिल्कुल मदद के लिए आगे आएगी।

सवाल - देश में अगर संक्रमण के मामले बढ़े, तो विदेश व्यापार कितना प्रभावित हो सकता है?

जवाब - यूरोप के कई देशों में संक्रमण की दूसरी या तीसरी लहर आने पर पहली लहर के जितना नुकसान नहीं हुआ। भारत के साथ भी ऐसा ही होगा। इसकी वजह यह है कि दुनिया भी अब वायरस के साथ जीना सीख रही है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी इसका खास असर नहीं होगा।

सवाल - वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान आर्थिक परिदृश्य कैसा रहने का अनुमान हैं और इसे आम आदमी की जिंदगी पर पड़ने वाले असर के लिहाज से कैसे देखा जा सकता है?

जवाब - हमारा अनुमान है कि आगामी वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 11 प्रतिशत के करीब रहेगी और खासतौर से दूसरी छमाही में तेजी देखने को मिल सकती है। इसमें कोई संदेह नहीं कि सबसे बुरा वक्त पीछे छूट चुका है। अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने के लिहाज से कोरोना संक्रमण से अधिक महत्वपूर्ण कारक मानसून है। इस साल मानसून अच्छा रहा तो कृषि क्षेत्र का बेहतर प्रदर्शन बरकरार रहेगा और इसका सकारात्मक असर विनिर्माण पर भी होगा। गौरतलब है कि ये दोनों क्षेत्र सबसे अधिक रोजगार देते हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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