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पटना: जेडी वीमेंस कॉलेज द्वारा 'बुर्का' शब्द को लिया गया वापस

By एस पी सिन्हा | Updated: January 26, 2020 06:52 IST

पटना स्थित जेडी वीमेंस कॉलेज ने नया ड्रेस कोड लागू किया है, जिसके तहत कॉलेज ने छात्राओं के लिए ड्रेस कोड के पालन करने को लेकर सख्ती दिखाते हुए बुर्का तक पहनकर कॉलेज आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.

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ठळक मुद्देपटना स्थित जेडी वीमेंस कॉलेज ने नया ड्रेस कोड लागू किया है, जिसके तहत कॉलेज ने छात्राओं के लिए ड्रेस कोड के पालन करने को लेकर सख्ती दिखाते हुए बुर्का तक पहनकर कॉलेज आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.कॉलेज की प्राचार्य डॉ श्यामा राय का कहना है कि आदेश वैसा ही है, बस 'बुर्का' शब्द को हटाया गया है और छात्राओं को अब कॉलेज कैंपस में यूनिफार्म में ही आना है. 

पटना स्थित जेडी वीमेंस कॉलेज ने नया ड्रेस कोड लागू किया है, जिसके तहत कॉलेज ने छात्राओं के लिए ड्रेस कोड के पालन करने को लेकर सख्ती दिखाते हुए बुर्का तक पहनकर कॉलेज आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. हालांकि इस मामले को तूल पकड़ता देख कॉलेज प्रशासन ने आदेश को वापस ले लिया है. कॉलेज की प्राचार्य डॉ श्यामा राय का कहना है कि आदेश वैसा ही है, बस 'बुर्का' शब्द को हटाया गया है और छात्राओं को अब कॉलेज कैंपस में यूनिफार्म में ही आना है. 

जेडी वीमेंस कॉलेज की प्राचार्य के आदेश पर लगे नोटिस का कुछ छात्राओं ने विरोध जताया तो वहीं कुछ छात्राओं ने इसका समर्थन किया. हंगामे के बाद कॉलेज प्रशासन ने नोटिस से बुर्का शब्द हटा दिया है, लेकिन ड्रेस कोड को सख्ती से अनुपालन करने का निर्देश दिया है. इस संबंध में कॉलेज की प्राचार्या का कहना है कि बुर्के की आड़ में छात्राएं ड्रेस पहनकर नहीं आती थीं. इसके साथ ही बुर्का पहनकर किसी युवक के या किसी तरह के अज्ञात के कॉलेज परिसर में घुस आने की आशंका को देखते हुए ही बुर्का पहनकर कॉलेज आने पर पाबंदी लगाई गई थी. लेकिन, अब इसपर हो रहे विवाद को देखते हुए कॉलेज ने नोटिस से बुर्का शब्द हटा दिया है. लेकिन, ड्रेस कोड को लेकर कोई बदलाव नहीं किया गया है.

यहां बता दें कि राजधानी कॉलेज में प्राचार्य श्यामा राय ने आदेश जारी किया है कि कॉलेज में निर्धारित पोशाक में छात्राएं प्रवेश करेंगी. इसके पहले उन्होंने यह आदेश जारी किया था कि कॉलेज केंपस और क्लास में छात्राएं बुर्का नहीं पहनेंगी. अगर वह ऐसा करते हुए पाई जाती हैं, तो उन्हें ढाई सौ रुपए जुर्माना देना होगा. कॉलेज प्रशासन की तरफ से कहा गया है कि अगर इन नियमों का छात्राएं पालन नहीं करेंगी तो उन्हें 250 रुपए फाइन देना होगा. छात्रा सबीना ने बताया कि क्लास रूम में अगर बुर्का बैन किया जाता है तो वह मंजूर है क्योंकि क्लास रूम में सभी एक समान हैं. लेकिन अगर कॉलेज कैंपस में बुर्का पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो उन्हें यह आदेश बिल्कुल स्वीकार नहीं है. वहीं कुछ छात्राओं का कहना है कि कॉलेज में सब को एक समान लगना चाहिए और इसी के लिए कॉलेज यूनिफार्म बना है और इसका पालन होना चाहिए.

कॉलेज की प्राचार्य डॉ श्यामा राय ने बताया कि कॉलेज में यूनिफार्म को लागू करना बहुत आवश्यक हो गया था क्योंकि रोजाना स्थानीय थाने से लगातार शिकायत आती है कि कॉलेज की छात्राएं बुर्का पहन कर आती है और अन्य गतिविधियों में भी शामिल होती हैं. उन्होंने कहा कि सिर्फ मुस्लिम छात्राएं ही नहीं बल्कि कई अन्य बाहरी तत्व भी कॉलेज में प्रवेश कर जाते हैं. बाहरी और कॉलेज छात्राओं में फर्क पता चले, इसी को लेकर यूनिफॉर्म की नियमावली जारी की गई है. प्राचार्य ने कहा कि यह पिछले साल अगस्त में ही सभी छात्राओं को बता दिया गया था और छात्राओं ने इसका विरोध नहीं किया था. कॉलेज की प्राचार्या डॉक्टर श्यामा राय ने कहा कि ये घोषणा हमने पहले ही की थी. नए सेशन के ओरिएंटेशन के समय में छात्राओं को बताया गया था. हमने ये नियम छात्राओं में एकरूपता लाने के लिए किया है. शनिवार के दिन वो अन्य ड्रेस पहन सकती हैं, शुक्रवार तक उन्हें ड्रेस कोड में आना है.इसके पहले ड्रेस कोड से बुर्का हटाने वाली नोटिस पर कॉलेज की नाराज छात्राओं ने कहा कि शायद ये पटना का पहला महिला कॉलेज है, जहां बुर्का को बैन किया गया है. छात्राओं ने कहा है कि इसका हम विरोध करेंगे. कॉलेज के इस नियमपर बहुत सारी छात्राओं को आपत्ति है. उनका कहना है कि बुर्के से कॉलेज को क्या दिक्कत है? ये नियम तो बस थोपने वाली बात है. वहीं, वर्ल्ड इंस्टीट्यूट ऑफ इस्लामिक स्टडीज़ फॉर डायलॉग की डीजी डॉक्टर जीनत शौकत अली कहती हैं कि बुर्का शब्द कहीं पर भी कुरान में नहीं आया है. कॉलेज अगर किसी के विशेष पहनावे पर रोक लगाता है तो यह व्यक्ति के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो सकता है. उन्होंने कहा कि इस्लाम में कहीं नहीं कहा गया है कि बच्चियां बुर्का पहनकर पढने जाएं. बस महिलाओं को सम्मानजनक तरीके से कपड़े पहनने को कहा गया है. छोटी-छोटी बातों को तूल देने की बजाय बच्चियों को पढाने पर जोर देना चाहिए.वहीं, इस मामले में पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रभाकर टेकरीवाल का कहना है कि कॉलेज में ड्रेस कोड तय है, तो पालन करना चाहिए. कोर्ट के लिए तय ड्रेस कोड का पालन वकील करते हैं. कोर्ट में कोई बुर्का पहन कर नहीं आता. लिहाजा, कॉलेज के मामले में भी आपत्ति का औचित्य नहीं है. कानूनन भी इसे अवैध नहीं ठहराया जा सकता. हालांकि इस मामले पर कार्यवाहक नाजिम, इमारत-ए-शरिया, मौलाना शिबली अलकासमी ने कहा है कि इसकी तहकीक जाएगी. अगर पाबंदी लगी है तो फिर इसका विरोध किया जाएगा. जेडी वीमेंस कॉलेज का यह कदम गलत है. यह प्राचार्या की मानसिकता को दर्शाता है. एक खास तबके को निशाना बनाया जा रहा है. यह समाज को तोड़ने वाला कदम है.

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