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पेगासस फोन टैपिंग आरोपों पर संसदीय समिति 28 जुलाई को कर सकती है पूछताछ

By भाषा | Updated: July 21, 2021 17:23 IST

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नयी दिल्ली, 21 जुलाई कांग्रेस नेता शशि थरूर के नेतृत्व वाली सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से जुड़ी संसदीय समिति पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल करते हुए फोन टैपिंग करने के आरोपों पर अगले सप्ताह गृह मंत्रालय सहित अन्य सरकारी अधिकारियों से पूछताछ कर सकती है। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी ।

मीडिया संस्थानों के अंतरराष्ट्रीय कंसोर्टियम ने दावा किया है कि आमतौर पर सरकारी एजेंसियों को ही बेचे जाने वाले इजराइल के जासूसी सॉफ्टवेयर के जरिए भारत के दो केन्द्रीय मंत्रियों, 40 से अधिक पत्रकारों, राहुल गांधी सहित विपक्ष के तीन नेताओं और एक न्यायाधीश सहित बड़ी संख्या में कारोबारियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के 300 से अधिक मोबाइल नंबर, हो सकता है कि हैक किए गए हों।

हालांकि सरकार ने अपने स्तर पर खास लोगों पर निगरानी रखने संबंधी आरोपों को खारिज किया है। इजराइली निगरानी कंपनी एनएसओ समूह ने भी इन खबरों को खारिज किया है ।

लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, थरूर के नेतृत्व वाली सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से जुड़ी संसदीय समिति की बैठक 28 जुलाई को निर्धारित है । इस बैठक का एजेंडा ‘नागरिक डाटा सुरक्षा एवं निजता’ है।

इस समिति में अधिकतर सदस्य सत्तारूढ़ भाजपा से हैं । समिति ने इलेक्ट्रानिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी एवं गृह मंत्रालय के अधिकारियों को बुलाया है।

सूत्रों ने कहा कि बैठक में पेगासस फोन टैपिंग का मामला निश्चित रूप से सामने आयेगा और अधिकारियों से जानकारी मांगी जायेगी ।

पेगासस स्पाईवेयर का उपयोग करते हुए ‘जासूसी’ का विषय संसद में और उसके बाहर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। इसके कारण संसद के मानसून सत्र में दो दिन विपक्षी सदस्यों ने भारी शोर शराबा किया।

इससे पहले थरूर ने पूरे कथित जासूसी प्रकरण को राष्ट्रीय सुरक्षा चिंता बताया था और सरकार से स्पष्टीकरण मांगा था ।

सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिये भारतीयों की जासूसी करने संबंधी खबरों को सोमवार को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि संसद के मॉनसून सत्र से ठीक पहले लगाये गए ये आरोप भारतीय लोकतंत्र की छवि को धूमिल करने का प्रयास हैं।

लोकसभा में स्वत: संज्ञान के आधार पर दिये गए अपने बयान में वैष्णव ने कहा था कि जब देश में नियंत्रण एवं निगरानी की व्यवस्था पहले से है तब अनधिकृत व्यक्ति द्वारा अवैध तरीके से निगरानी संभव नहीं है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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