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परमबीर के पास देशमुख के खिलाफ आरोपों पर कोई सीधी जानकारी नहीं: वकील ने आयोग से कहा

By भाषा | Updated: November 23, 2021 23:35 IST

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मुंबई, 23 नवंबर मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह को महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के अपने आरोपों के बारे में कोई सीधी जानकारी नहीं है क्योंकि कथित गलत काम के बारे में जानकारी उन्हें कुछ अधिकारियों ने दी थी। यह बात वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के एक वकील ने मंगलवार को एक जांच आयोग से कही।

सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति के. यू. चांदीवाल की अध्यक्षता वाला आयोग देशमुख के खिलाफ लगाये गये भ्रष्टाचार और आधिकारिक पद के दुरुपयोग के आरोपों की जांच कर रहा है।

इस साल मार्च में, महाराष्ट्र सरकार ने राकांपा नेता देशमुख (71) के खिलाफ सिंह के आरोपों की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग का गठन किया था। देशमुख ने बम्बई उच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद अप्रैल में राज्य मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था।

मंगलवार को, मुंबई पुलिस के बर्खास्त अधिकारी सचिन वाजे से जिरह आयोग के सामने सूचीबद्ध थी। कार्यवाही शुरू होने पर वाजे ने आयोग के समक्ष एक याचिका दायर करके अपनी जिरह को तब तक के लिए टालने का अनुरोध किया जब तक कि सिंह जांच आयोग के सामने पेश नहीं हो जाते या एक हलफनामा दाखिल नहीं कर देते।

हालांकि, आयोग ने उनकी याचिका खारिज कर दी। जिरह के दौरान, सिंह के वकील अभिनव चंद्रचूड़ ने दोहराया कि वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के पास इस मामले में साझा करने के लिए कोई और सबूत नहीं है।

वकील ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि उनकी (वाजे की) आशंका यह है कि आज वह गवाह वाले कटघरे में खड़े होंगे और कल मेरे मुवक्किल (सिंह) कुछ अलग कहेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘हलफनामे में एक सप्ताह लगेगा। जो पहले ही कहा जा चुका है, उससे ज्यादा कुछ नहीं कहा जाएगा, जो यह है कि उन्हें दी गई जानकारी कुछ अधिकारियों द्वारा प्रदान की गई थी ... उन्हें (सिंह को) कोई प्रत्यक्ष जानकारी नहीं है कि क्या हुआ था।’’

आयोग द्वारा पेश होने के लिए कई समन और एक जमानती वारंट जारी किये जाने के बावजूद सिंह अभी तक पेश नहीं हुए हैं। मंगलवार को उनके वकील ने आयोग को बताया कि सिंह मामले के संबंध में एक और हलफनामा दायर करेंगे।

इससे पहले, मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त ने एक हलफनामे में, आयोग को बताया था कि उनके पास इस मामले में साझा करने के लिए कोई और सबूत नहीं है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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