लाइव न्यूज़ :

महामारी के चलते कागज रहित सुनवायी तंत्र आया: कानून मंत्रालय अधिकारी

By भाषा | Updated: April 11, 2021 18:48 IST

Open in App

नयी दिल्ली, 11 अप्रैल कोरोना वायरस महामारी के चलते पर्यावरण अनुकूल और कागज रहित सुनवायी तंत्र आया है जिससे नागरिकों की सुविधा में बढोतरी हुई है। कानून मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने यह बात कही।

कानून मंत्रालय में सचिव (न्याय) बरुण मित्रा ने शुक्रवार को फैसलों और ई-फाइलिंग के लिए एक नई वेबसाइट शुरू करने के लिए आयोजित एक आनलाइन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि महामारी ने अदालत के डिजिटलीकरण के रास्ते में आने वाली एक "अवधारणा बाधा" को तोड़ने में मदद की है।

उन्होंने कहा कि महामारी और लॉकडाउन के दौरान अदालतें लोगों की मौजूदगी में काम नहीं कर सकती थीं, लेकिन सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के साधनों के चलते उनके कामकाज में कोई ठहराव नहीं आया।

मित्रा ने बताया कि वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए 86 लाख से अधिक मामलों की सुनवाई हुई।

उन्होंने कहा, ‘‘महामारी के दौरान आनलाइन अदालतों की निरंतर वृद्धि से पर्यावरण अनुकूल, कागज रहित सुनवायी तंत्र विकसित हुआ जिससे नागरिकों की सुविधा में इजाफा हुआ है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Open in App

संबंधित खबरें

भारतगोदामों से सीधे एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर सख्त प्रतिबंध, सीएम रेखा गुप्ता ने कहा-भंडारण केंद्रों पर न जाएं और न ही भीड़ में इकट्ठा हों

पूजा पाठPanchang 06 April 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 06 April 2026: आज इन 4 राशिवालों को होगा चौतरफा लाभ, नौकरी-व्यापार में होगी तरक्की

भारतउच्च शिक्षा और अनुसंधान की चुनौतियां

क्राइम अलर्टशिक्षा संस्थाओं में भी अंधविश्वास का घेरा! 

भारत अधिक खबरें

भारतआदिवासी खेल: नई प्रतिभाओं की तलाश में एक सार्थक पहल

भारतबारामती विधानसभा उपचुनावः सीएम फडणवीस की बात नहीं मानी?, कांग्रेस ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के खिलाफ आकाश मोरे को चुनाव मैदान में उतारा

भारतUP की महिला ने रचा इतिहास! 14 दिनों में साइकिल से एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं

भारतLadki Bahin Yojana Row: महाराष्ट्र में 71 लाख महिलाएं अयोग्य घोषित, विपक्ष ने किया दावा, सरकार की जवाबदेही पर उठाए सवाल

भारतयूपी बोर्ड ने 2026-27 के लिए कक्षा 9 से 12 तक NCERT और अधिकृत पुस्तकें अनिवार्य कीं