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पद्म श्री से सम्मानित पर्यावरणविद राधा मोहन का निधन

By भाषा | Updated: June 11, 2021 13:41 IST

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भुवनेश्वर, 11 जून पद्म श्री से सम्मानित पर्यावरणविद और ओडिशा के पूर्व सूचना आयुक्त प्रोफेसर राधा मोहन का शुक्रवार को यहां एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। परिवार के सूत्रों ने यह जानकारी दी। वह 78 वर्ष के थे और उनके परिवार में तीन बेटियां हैं।

अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि गांधीवादी विचाराधारा के राधा मोहन निमोनिया होने के बाद पिछले कुछ दिनों से आईसीयू में भर्ती थे।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नवीन पटनायक समेत कई लोगों ने उनके निधन पर शोक जताया है।

राधा मोहन और उनकी बेटी साबरमती को नयागढ़ जिले में बंजर जमीन को हरे भरे जंगल में बदलने की उनकी 30 साल की कोशिशों के लिए पिछले साल पद्म श्री दिया गया था।

पिता-पुत्र ने सतत जैविक खेती पर किसानों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए एक सामाजिक संगठन बनाया था।

नयागढ़ जिले में एक छोटे-से गांव में 1943 को जन्मे राधा मोहन ने पुरी में एसीएस कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक किया और 1965 में उत्कल विश्वविद्यालय से प्रायोगिक अर्थशास्त्र में परास्नातक किया।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उनके निधन पर शोक जताते हुए ट्वीट किया, ‘‘प्रोफेसर राधा मोहन एक प्रेरणादायक अर्थशास्त्री और पर्यावरणविद थे। वह बड़े विद्वान थे जिन्होंने प्रकृति और मानवता को समृद्ध बनाने के लिए जैविक खेती की तरफ रुख किया। उनके निधन से एक शून्य पैदा हो जाएगा। उनके परिवार तथा प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं।’’

ओडिशा सरकार ने उनकी उत्कृष्ट सामाजिक सेवा के लिए उन्हें उत्कल सेवा सम्मान भी दिया था। इसी तरह यूएनईपी ने पर्यावरण पर उल्लेखनीय काम के लिए राधा मोहन को ‘‘द ग्लोबल रोल ऑफ ऑनर’’ से सम्मानित किया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘प्रो. राधा मोहन जी खेती खासतौर से सतत और जैविक खेती अपनाने को लेकर बहुत उत्साही थे। अर्थशास्त्र और पारिस्थितिकी से संबंधित विषयों पर जानकारी के लिए भी उनका बहुत सम्मान किया जाता था। उनके परिवार तथा प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। ओम शांति।’’

मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ट्वीट किया, ‘‘गांधीवादी विचारधारा के और पद्म श्री से सम्मानित प्रो. राधामोहन के निधन के बारे में जानकार बहुत दुखी हूं। अर्थशास्त्री से पर्यावरणविद बने राधा मोहन ने सतत जैविक खेती में उल्लेखनीय योगदान दिया। शोक संतप्त परिवार के सदस्यों और शुभचिंतकों के साथ मेरी संवेदनाएं हैं।’’

आंध्र प्रदेश के राज्यपाल बी बी हरिचंदन ने राधा मोहन के निधन को ओडिशा के जैविक खेती क्षेत के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

केंद्रीय मंत्री धमेंद्र प्रधान ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और जैविक खेती के लिए उनकी प्रतिबद्धता आने वाले समय में याद रखी जाएगी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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