Amarnath Yatra: अब अमरनाथ यात्रा का मोर्चा कश्मीर में, दो महीने यात्राओं से जूझेगा राज्य प्रशासन
By सुरेश एस डुग्गर | Updated: June 11, 2023 16:42 IST2023-06-11T16:42:47+5:302023-06-11T16:42:47+5:30
अमरनाथ यात्रा समेत कई धार्मिक यात्राएं जुलाई और अगस्त के दौरान राज्य में संपन्न होती हैं। अधिकतर एक से 7 दिनों तक चलने वाली होती हैं मगर अमरनाथ यात्रा इस बार 62 दिनों तक चलेगी।

Amarnath Yatra: अब अमरनाथ यात्रा का मोर्चा कश्मीर में, दो महीने यात्राओं से जूझेगा राज्य प्रशासन
जम्मू: इस महीने की आखिरी तारीख यानी 30 जून से जम्मू कश्मीर अब भक्तिमय होने जा रहा है। दो महीनों तक प्रदेश प्रशासन सभी कामकाज छोड़ कर उन धार्मिक यात्राओं से जूझने जा रहा है जो कई बार भारी भी साबित हुई हैं। इनमें सबसे अधिक लम्बी और भयानक समझी जाने वाली अमरनाथ यात्रा है जिसको क्षति पहुंचाने के लिए अगर अप्रत्यक्ष तौर पर आतंकी कमर कस चुके हैं तो सुरक्षाबल भी।
अमरनाथ यात्रा समेत कई धार्मिक यात्राएं जुलाई और अगस्त के दौरान राज्य में संपन्न होती हैं। अधिकतर एक से 7 दिनों तक चलने वाली होती हैं मगर अमरनाथ यात्रा इस बार 62 दिनों तक चलेगी। मतलब 62 दिनों तक प्रदेश प्रशासन की सांस गले में इसलिए भी अटकी रहती है क्योंकि आतंकी उसे क्षति पहुंचाने का कोई अवसर खोना नहीं चाहते हैं।
19 दिनों के बाद अमरनाथ यात्रा का पहला आधिकारिक दर्शन होगा। सेना समेत अन्य सुरक्षाबलों ने सुरक्षा का जिम्मा संभालना आरंभ कर दिया है। हजारों केरिपुब जवानों को भी तैनात किया जा रहा है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर डेढ़ लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में जुटेंगें। फिर भी यह चिंता का विषय इसलिए बनी हुई है क्योंकि सूचनाएं और खबरें कह रही हैं कि आतंकी किसी भी कीमत पर इसे निशाना बनाना चाहते हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस बार अमरनाथ यात्रा पर कोई आतंकी खतरा होने की खबरों से प्रशासन इंकार कर रहा है।
सबसे अधिक खतरा 300 किमी लम्बे जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर आतंकी हमलों और बारूदी सुरंगों का होता है। यात्रा से पूर्व हाईवे पर तैनात रोड ओपनिंग पार्टी (आरओपी) की संख्या कई गुना बढ़ाई जा रही है। आरओपी की 170 पार्टियों को हाईवे पर तैनात करने की योजनाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है और प्रत्येक पार्टी के दौ सैनिकों को 12 मीटर के हाईवे की सुरक्षा का जिम्मा दिया जाएगा।
इन आरओपी को प्रशिक्षित डाग स्क्वॉड के सुसज्जित किया जाएगा है ताकि हाईवे पर लगाई गई किसी भी आईईडी का पता लगाया जा सके। इन डाग स्क्वॉड के कुत्तों की खासियत है कि यह आईईडी मिलते ही बैठ जाते हैं जिससे सुरक्षाबलों को उस स्थान की निशानदेही करने में आसानी होती है।
सुरक्षा के चाक चौबंद प्रबंधों के लिए वह तनावपूर्ण माहौल बताया जा रहा है जिसमें कोई खतरा न होने की खबरों के बावजूद सुरक्षा प्रबंधों को हाई अलर्ट के स्तर रखने के लिए कहा गया है क्योंकि हाइब्रिड आतंकी अभी भी खतरा बने हुए हैं।
आतंकी हमलों की आशंकित योजनाओं की सभी प्रकार की सभी जानकारियों को विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां साझा कर रही हैं और सुरक्षा का मुख्य जिम्मा सेना को सौंपा गया है। पहलगाम से गुफा और बालटाल से गुफा तक के रास्तों पर आतंकी हमलों से बचाव का जिम्मा सही मायनों में हमेशा भगवान भरोसे इसलिए रहता है क्योंकि इन पहाड़ों में सुरक्षा व्यवस्था के दावे हमेशा झूठे पड़ते नजर आए हैं।
अब राजमार्ग पर सेना, यात्रा मार्ग पर उसका साथ अन्य सुरक्षाबल देंगे तो जम्मू के बेस कैम्प में सभी सुरक्षाबलों को एकसाथ तैनात किया जाएगा। अधिकारी आप मानते हैं कि जम्मू के बेस कैम्प में खतरा हो सकता क्योंकि वहां से पाकिस्तान अधिक दूर नहीं है तो पुराना बेस कैम्प शहर के बीचों बीच होने के कारण पहले भी खतरे से जूझता रहा है।