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विपक्षी दलों ने जम्मू क्षेत्र के हितों के लिए संगठित होने का आह्वान किया

By भाषा | Updated: November 8, 2021 22:30 IST

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जम्मू, आठ नवंबर जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली की मांगों के बीच विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े तीन पूर्व मंत्रियों और जिला विकास परिषद के एक निर्दलीय सदस्य समेत कई जानीमानी हस्तियों ने सोमवार को जम्मू के हितों की सुरक्षा का संकल्प लिया।

पूर्व मंत्री लाल सिंह द्वारा स्थापित डोगरा स्वाभिमान संगठन (डीएसएस) द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में जम्मू कश्मीर कांग्रेस के उपाध्यक्ष रमन भल्ला और नेशनल पैंथर्स पार्टी (एनपीपी) के अध्यक्ष हर्षदेव सिंह आदि ने भाग लिया। भल्ला और सिंह दोनों पूर्व मंत्री हैं। संगोष्ठी का विषय ‘जम्मू को समझना: चुनौतियां और आगे का रास्ता’ था।

उन्होंने कहा कि यह मंच ‘किसी धर्म या क्षेत्र’ के खिलाफ नहीं है बल्कि भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ जम्मू क्षेत्र की जनता को संगठित करने की कवायद है जिसने अपने ‘खोखले वादों और भ्रामक बयानों’ से कथित तौर पर जनता को छला है।

भल्ला ने कहा, ‘‘डोगरा शासकों द्वारा स्थापित पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य को बांट दिया गया और जम्मू क्षेत्र की जनता से वादे किए गए कि दशकों तक हुए भेदभाव को समाप्त किया जाएगा। उन्होंने जनता को गुमराह किया और उनके सभी वादे खोखले साबित हुए।’’

डीएसएस संस्थापक ने कहा कि उन्होंने जनता के हितों पर सत्तारूढ़ पार्टी के कथित हमलों के खिलाफ जम्मू को संगठित करने की जिम्मेदारी ली है।

जुलाई 2018 में भाजपा से अलग होने के बाद लाल सिंह ने 21 सूत्री दृष्टिपत्र जारी किया था, जिसमें बारी-बारी से मुख्यमंत्री बनाने, लोगों को रोजगार के समान अवसर देने, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और उपभोग तथा डोगरा प्रमाणपत्र समेत अनेक मांगें शामिल थीं।

हालांकि अगस्त 2019 में पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य को केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित करने और उसका विशेष राज्य का दर्जा समाप्त किये जाने के बाद सिंह जम्मू क्षेत्र को अलग राज्य का दर्जा देने की मांग उठाते आ रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जनता को लोक-लुभावन बातें करके छल रही है लेकिन जनता ने उसका वास्तविक चेहरा देख लिया है।

एनपीपी अध्यक्ष हर्षदेव सिंह ने नागरिक संस्थाओं, जम्मू के छात्रों, युवाओं, व्यापारियों और किसानों से क्षेत्र के हित के लिए संगठित होने का आह्वान किया।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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