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खुले दिल्ली, तमिलनाडु और केरल में करीब 19 महीने बाद छात्रों के लिए फिर से खुले स्कूल

By भाषा | Updated: November 1, 2021 22:13 IST

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नयी दिल्ली, एक नवंबर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, तमिलनाडु और केरल में करीब 19 महीने तक बंद रहने के बाद कोविड-19 नियमों का पालन करते हुए सोमवार को विद्यार्थियों के लिए स्कूलों के दरवाजे खोल दिये गए। अपने सहपाठियों और शिक्षकों से मिलकर बच्चे बेहद उत्साहित नजर आए।

बच्चे मास्क पहनकर आए थे और थर्मल जांच के बाद उन्हें विद्यालय में प्रवेश दिया गया। शिक्षकों ने बच्चों के बीच उपहार और मिठाइयां भी वितरित कीं।

राष्ट्रीय राजधानी में करीब 19 महीने बाद सोमवार को आठवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए कई स्कूल 50 प्रतिशत क्षमता के साथ खुल गए। वहीं, ज्यादातर निजी विद्यालय दीपावली के बाद खुलेंगे।

इस बीच, दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पूर्वी दिल्ली के विनोद नगर में राजकीय सर्वोदय विद्यालय पहुंचे और छात्रों के साथ बातचीत की। सिसोदिया ने स्कूल में प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के साथ समय बिताया, जहां एक छात्र उनका चिकित्सक बना और शिक्षा मंत्री ने एक मरीज की भूमिका निभाई।

उप मुख्यमंत्री ने ट्विटर पर कुछ तस्वीरें साझा करते हुए मजाकिया अंदाज में लिखा, ‘‘ स्कूल की कक्षा में इस खास चिकित्सक से मिला। पूरे शरीर की जांच कराई, इंजेक्शन और दवा भी ली... मुझे आइसक्रीम ना खाने की सलाह दी गई है...।’’

दिल्ली के कई सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों ने बताया कि विद्यालय खुलने के पहले दिन भले ही विद्यार्थियों की उपस्थिति बेहद कम थी लेकिन उन्हें उम्मीद है कि दीपावली के बाद अधिक संख्या में बच्चे विद्यालय आएंगे।

लाजपत नगर में दक्षिण दिल्ली नगर निगम प्राथमिक विद्यालय के एक शिक्षक ने कहा कि यहां सिर्फ पांचवीं तक की कक्षाएं चलती हैं और कुल विद्यार्थियों की संख्या 120 है। विद्यालय खुलने पर पहले दिन सिर्फ 10 विद्यार्थी ही विद्यालय आए और कुछ कक्षाओं में सिर्फ एक ही विद्यार्थी थे, बाकी सब ने ऑनलाइन माध्यम से ही पढ़ाई करने का निर्णय लिया है।

वहीं, आठवीं कक्षा के एक विद्यार्थी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया, ‘‘ मैं नियमित तौर पर विद्यालय आने को लेकर उत्साहित हूं। लगभग दो साल बाद विद्यालय लौटकर अच्छा लगा। निश्चित तौर पर ऑनलाइन कक्षाएं फायदेमंद रहीं, लेकिन विद्यालय आकर कक्षाओं में व्यक्तिगत मौजूदगी से बहुत सारे सवालों के जवाब तुरंत मिल जाते हैं।’’

तमिलनाडु में भी 19 महीने के बाद सोमवार को पहली से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए स्कूल एक बार फिर से खुल गए। राज्य के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के नेतृत्व में स्कूल पहुंचे विद्यार्थियों का जगह-जगह पारंपरिक रूप से स्वागत किया गया।

स्टालिन ने इससे पहले स्कूल आने वाले बच्चों के लिए सौहार्दपूर्ण स्वागत का आह्वान किया था। मुख्यमंत्री ने यहां गिंडी में चेन्नई महानगर पालिका द्वारा संचालित एक स्कूल का दौरा किया और बच्चों को शिक्षा किट और मिठाई वितरित की। इस अवसर पर उनके साथ राज्य के मंत्री ई वी वेलू और एम सुब्रमण्यम भी मौजूद रहे।

कोविड-19 महामारी के कारण काफी लंबे समय बाद राज्य भर में पहली से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए स्कूलों को खोल दिया गया। स्कूलों के फिर से खुलने से विद्यार्थियों में उत्साह देखा गया और प्रशासन ने भी विभिन्न जगहों पर पारंपरिक रूप से उनका स्वागत कर उत्साह बढ़ाया। विद्यार्थियों के स्वागत के लिए पारंपरिक नागस्वरम-थविली वाद्ययंत्र भी बजाए गए।

वहीं, केरल में कोविड-19 के कारण डेढ़ साल से ज्यादा समय तक बंद रहने के बाद स्कूल सोमवार को पुनः खुले और हजारों बच्चों ने पहली बार वहां कदम रखा। राज्य में पहली से सातवीं कक्षा, दसवीं और बारहवीं कक्षा के छात्र स्कूल पहुंचे, जिन्हें कोविड प्रोटोकॉल के तहत सैनिटाइजेशन और थर्मल जांच की प्रक्रिया के बाद कक्षाओं में भेजा गया। स्कूलों को बच्चों के स्वागत में सजाया गया था। स्कूल में बच्चों का तापमान मापा गया, उन्हें सैनिटाइजर और मास्क दिये गये।

कक्षा आठ, नौ और 11 के बच्चों के लिए ऑफलाइन कक्षाएं 15 नवम्बर से चालू होंगी। डेढ़ साल से ज्यादा समय के बाद स्कूल जाने वाले बच्चे उत्साहित नजर आए । पहली और दूसरी कक्षा के बच्चे पहली बार स्कूल पहुंचे। स्कूल के कर्मचारियों ने उपहार देकर बच्चों का स्वागत किया जिनमें पुस्तकें, पेन, सैनिटाइजर, मास्क और गुब्बारे शामिल थे। शिक्षक भी उत्साहित और खुश दिखाई दिए।

एर्नाकुलम के एक स्कूल की शिक्षिका दीपा ने पीटीआई-भाषा से कहा, “ऑनलाइन कक्षाओं के अपने फायदे हैं, लेकिन हमें हमेशा अपेक्षित फीडबैक नहीं मिलता। मैं बहुत खुश हूं कि स्कूल अब फिर से खुल गए हैं और हम बच्चों से मिल पा रहे हैं। हम उन्हें पढ़ा सकेंगे और उनके साथ समय बिता सकेंगे। हालांकि, हमें अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी क्योंकि महामारी अब भी है।”

इस बीच, माता पिता भी उत्साहित दिखाई दिए क्योंकि अब उनके बच्चे घर की चारदीवारी से बाहर निकल कर स्कूलों में ज्यादा समय बिता सकेंगे।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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