बिहार से राज्यसभा की 5 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में नामांकन के लिए बचे हैं मात्र 3 दिन, उम्मीदवारों को लेकर कायम है संशय

By एस पी सिन्हा | Updated: March 2, 2026 15:40 IST2026-03-02T15:39:59+5:302026-03-02T15:40:07+5:30

एक ओर जहां एनडीए अपनी संख्या बल के आधार पर 4 सीटें आसानी से जीतती दिख रही है, वहीं 5वीं सीट के लिए वह महागठबंधन के खेमे में सेंध लगाने की पूरी तैयारी में है।

Only three days are left for filing nominations for the five Rajya Sabha seats in Bihar, and uncertainty persists over the candidates | बिहार से राज्यसभा की 5 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में नामांकन के लिए बचे हैं मात्र 3 दिन, उम्मीदवारों को लेकर कायम है संशय

बिहार से राज्यसभा की 5 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में नामांकन के लिए बचे हैं मात्र 3 दिन, उम्मीदवारों को लेकर कायम है संशय

पटना:बिहार से राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने राज्य की राजनीति में ‘जोड़-तोड़’ और ‘सेंधमारी’ के खेल को चरम पर पहुंचा दिया है। 5 मार्च को नामांकन की आखिरी तारीख है, लेकिन असली संशय 5वीं सीट को लेकर बना हुआ है। एक ओर जहां एनडीए अपनी संख्या बल के आधार पर 4 सीटें आसानी से जीतती दिख रही है, वहीं 5वीं सीट के लिए वह महागठबंधन के खेमे में सेंध लगाने की पूरी तैयारी में है। नामांकन प्रक्रिया में अब सिर्फ तीन दिन बचे होने के बावजूद किसी भी गठबंधन की ओर से अपने किसी भी उम्मीदवार आ ऐलान नहीं किया गया है।  

बता दें इ 4 मार्च को होली है, ऐसे में संभावना है कि नामांकन के आखिरी दिन ही उम्मीदवारों के नाम आधिकारिक रूप से सार्वजनिक होंगे। इस बार बिहार विधानसभा में संख्याबल का गणित ऐसा है कि राजद को अपनी दो में से एक भी सीट बचती नहीं दिख रही है। उसे एक सीट बचाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। राजद एक सीट बचाने की कोशिशों में लगी हुई है। कभी तेजस्वी यादव के नामों की अटकलें लगाई जा रही है तो कभी किसी धन्ना सेठ की चर्चाओं ने सियासी माहौल को रोचक बना दिया है। 5वीं सीट के लिए महागठबंधन भी पूरा जोर लगा रहा है। उसके पास पर्याप्त संख्या नहीं है, इसलिए वह अतिरिक्त समर्थन जुटाने की कोशिश में है। उधर एनडीए भी 5वीं सीट जीतने की रणनीति बना रहा है। इसके लिए विपक्षी खेमे में सेंधमारी की कोशिशों की चर्चा है। खासकर नाराज विधायकों और छोटे दलों पर नजर रखी जा रही है। यानी चुनाव सिर्फ संख्या का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रबंधन, रणनीति और प्रभाव का भी है। 

वहीं, राज्यसभा चुनाव के इस जटिल गणित के बीच सबसे बड़ी चर्चा यह है कि जदयू कोटे से निशांत कुमार को राज्यसभा भेजा जा सकता है। हालांकि आधिकारिक तौर पर कुछ घोषित नहीं हुआ है। लेकिन लंबे समय से पार्टी के भीतर उन्हें राजनीति में लाने की मांग उठती रही है। विधानसभा चुनाव के दौरान निशांत कई क्षेत्रों में सक्रिय भी दिखे थे। समर्थकों ने खुले तौर पर उनसे राजनीति में आने की अपील की थी। अगर उन्हें राज्यसभा भेजा जाता है, तो यह सक्रिय राजनीति में उनकी औपचारिक एंट्री मानी जाएगी। हालांकि एनडीए में भी जबर्दस्त घमासान देखने को मिल रहा है। रालोमो अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के अलावा केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की नजर है। 

मांझी ने एक बार फिर से राज्यसभा की एक सीट पर अपना दावा ठोक दिया है। एनडीए में सिर्फ मांझी और कुशवाहा ही नहीं इस सीट की चाहत रखते हैं, बल्कि भाजपा और जदयू की नजर भी जमी हुई हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि अगर जदयू की ओर से हरिवंश नारायण सिंह को रिपीट नहीं किया जाएगा, तो भाजपा उन्हें पांचवीं सीट से उच्च सदन भेज सकती है। इसके अलावा भोजपुरी स्टार पवन सिंह को भी इसी सीट से राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा जोरों पर हैं। 

वहीं उपेन्द्र कुशवाहा के पास महज 4 विधायक हैं, जिनके दम पर राज्यसभा जाना नामुमकिन है। सूत्रों की मानें तो भाजपा उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजने को तैयार है, लेकिन इसके बदले एक ‘भारी कीमत’ मांगी गई है। शर्त यह है कि कुशवाहा अपनी पार्टी का भाजपा में विलय कर दें। इससे भाजपा के विधायकों की संख्या 89 से बढ़कर 93 हो जाएगी। यदि कुशवाहा तैयार होते हैं, तो उन्हें केंद्र में मंत्री पद और उनके विधायकों को राज्य मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। अभी उन्हें दिल्ली तलब किया गया है। 

इसी बीच एआईएमआईएम ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि उसने महागठबंधन को समर्थन देने को लेकर अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अख्तरुल इमान ने सोमवार को कहा कि इस मुद्दे पर बातचीत जारी है और फिलहाल कुछ भी फाइनल नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महागठबंधन को समर्थन देने या न देने पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। बातचीत चल रही है। बातचीत के बाद ही कहा जा सकेगा कि अंतिम फैसला क्या होगा। हालांकि उन्होंने यह जरूर जोड़ा कि तेजस्वी यादव से इस मसले पर चर्चा हो चुकी है। 

वहीं, एनडीए को समर्थन देने के सवाल पर अख्तरुल इमान ने दो टूक कहा कि एआईएमआईएम किसी भी सूरत में एनडीए को समर्थन नहीं दे सकती। उन्होंने दावा किया कि एनडीए के भीतर खुद ही घमासान मचा हुआ है और उपेंद्र कुशवाहा की सीट भी फंसी हुई है। उन्होंने कहा कि 5 तारीख तक ही साफ हो पाएगा कि उम्मीदवार कौन होगा और एआईएमआईएम आगे क्या रुख अपनाएगी। दरअसल, राजद के कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के राज्यसभा चुनाव लड़ने की चर्चाएं जोरों पर हैं, हालांकि तेजस्वी ने अभी तक इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं की है। रविवार को उन्होंने अपने विधायक दल की बैठक भी बुलाई थी। 

उल्लेखनीय है कि राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। राजद के पास फिलहाल 25 विधायक हैं। महागठबंधन में शामिल कांग्रेस के 6, वाम दलों के 3 और आईपीपी के 1 विधायक को जोड़ने पर यह संख्या 35 तक पहुंचती है। ऐसे में बहुमत के लिए एआईएमआईएम के 5 और बसपा के 1 विधायक का समर्थन निर्णायक हो सकता है। हालांकि, ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने अभी तक अपना पत्ता नहीं खोला है, जिससे राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी संशय बना हुआ है। जबकि एनडीए के पास 202 विधायक हैं। ऐसे में एनडीए के चार सीटों पर जीत तय मानी जा रही है।

Web Title: Only three days are left for filing nominations for the five Rajya Sabha seats in Bihar, and uncertainty persists over the candidates

भारत से जुड़ीहिंदी खबरोंऔर देश दुनिया खबरोंके लिए यहाँ क्लिक करे.यूट्यूब चैनल यहाँ इब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट. सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Pageलाइक करे