लाइव न्यूज़ :

केवल 25.9 प्रतिशत एसटी परिवारों के पास बेहतर, निजी स्वच्छता सुविधाएं : अध्ययन

By भाषा | Updated: July 20, 2021 10:41 IST

Open in App

नयी दिल्ली, 20 जुलाई सामान्य श्रेणी में आने वाले करीब 66 प्रतिशत परिवारों की बेहतर और दूसरों से साझा नहीं किए जाने वाले निजी स्वच्छता सुविधाओं तक पहुंच हैं जबकि सिर्फ 25.9 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति (एसटी) परिवारों के पास बेहतर, निजी स्वच्छता सुविधाएं हैं। एक नयी रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।

ऑक्सफैम की ‘इंडिया इनइक्वलिटी रिपोर्ट 2021’ के अनुसार करीब 50 प्रतिशत अनुसूचति जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) परिवारों को सामान्य श्रेणी के 18.2 प्रतिशत परिवारों की तुलना में गैर-कोविड चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंचने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘आंकड़ों से पता चलता है कि सामान्य श्रेणी के 65.7 प्रतिशत परिवारों की बेहतर, निजी स्वच्छता सुविधाओं तक पहुंच है जबकि केवल 25.9 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के परिवारों ने निजी स्वच्छता सुविधाओं के मामले में सुधार किया है।’’

रिपोर्ट में यह भी पता चला कि सामान्य श्रेणी के परिवारों की तुलना में अनुसूचित जाति के 12.6 प्रतिशत से अधिक परिवारों में बच्चों का विकास ठीक तरीके से नहीं हुआ।

यह रिपोर्ट देश में विद्यमान स्वास्थ्य असमानता के स्तर को मापने के लिए विभिन्न सामाजिक आर्थिक समूहों में स्वास्थ्य परिणामों का विश्लेषण करती है। इसमें इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि कोविड-19 महामारी ने इन असमानताओं को और बढ़ा दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार विशेषकर स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच के मामले में हिंदू परिवार मुस्लिम परिवारों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। कम आय वालों को कोविड-19 से संक्रमित होने पर अन्य की तुलना में समुदाय में पांच गुना अधिक भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 18.2 प्रतिशत पुरुषों की तुलना में 33.9 प्रतिशत महिलाओं ने लॉकडाउन के दौरान चिंता, चिड़चिड़ापन, क्रोध और नींद की कमी का अनुभव किया। इसमें यह भी कहा गया है कि बालकों की तुलना में बालिकाओं का टीकाकरण कम रहा और ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में टीकाकरण अधिक हुआ। इसके अनुसार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के समुदाय में टीकाकरण अन्य की तुलना में कम रहा।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जिन राज्यों में असमानताओं को कम करने और स्वास्थ्य सुविधाओं पर अधिक खर्च किया, वहां संक्रमण के मामले कम आए। इसके अनुसार, ‘‘स्वास्थ्य पर अधिक खर्च वाले राज्यों में कोविड-19 से ठीक होने की दर भी अधिक थी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Open in App

संबंधित खबरें

क्रिकेटइंडियन प्रीमियर लीग में भुवनेश्वर कुमार ने जड़ा 'दोहरा शतक', ऐसा करने वाले दुनिया के दूसरे गेंदबाज, जानें पहले पायदान पर कौन?

क्रिकेट37 के साथ सबसे आगे CSK?, आईपीएल में सबसे ज्यादा 200 से अधिक रन बनाने वाली टीमें, देखिए टॉप-5 लिस्ट

क्राइम अलर्टमैडम दुकान के सामने गाड़ी मत लगाओ, ग्राहक को आने में दिक्कत होगी?, 78 वर्षीय दुकानदार को महिला उपनिरीक्षक ने थप्पड़ मारा, प्राथमिकी दर्ज

भारतगोदामों से सीधे एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर सख्त प्रतिबंध, सीएम रेखा गुप्ता ने कहा-भंडारण केंद्रों पर न जाएं और न ही भीड़ में इकट्ठा हों

पूजा पाठPanchang 06 April 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

भारत अधिक खबरें

भारतउच्च शिक्षा और अनुसंधान की चुनौतियां

भारतआदिवासी खेल: नई प्रतिभाओं की तलाश में एक सार्थक पहल

भारतबारामती विधानसभा उपचुनावः सीएम फडणवीस की बात नहीं मानी?, कांग्रेस ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के खिलाफ आकाश मोरे को चुनाव मैदान में उतारा

भारतUP की महिला ने रचा इतिहास! 14 दिनों में साइकिल से एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं

भारतLadki Bahin Yojana Row: महाराष्ट्र में 71 लाख महिलाएं अयोग्य घोषित, विपक्ष ने किया दावा, सरकार की जवाबदेही पर उठाए सवाल