लाइव न्यूज़ :

केरल डिजिटल विश्वविद्यालय के परास्नातक पाठ्यक्रमों में मौके पर ही प्रवेश

By भाषा | Updated: October 1, 2021 15:21 IST

Open in App

तिरुवनंतपुरम, एक अक्टूबर केरल डिजिटल विश्वविद्यालय (डीयूके) परास्नातक पाठ्यक्रम की खाली बची सीटों पर ऑनलाइन माध्यम से छह अक्टूबर को मौके पर ही प्रवेश देगा, जिनमें आरक्षित वर्ग की सीटें भी शामिल हैं।

विश्वविद्यालय ने एक बयान में बताया कि कंप्यूटर विज्ञान और अभियांत्रिकी में एमटेक, इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में एमटेक, इकोलॉजिकल इन्फॉर्मेटिक्स में विशेषज्ञता के साथ इकोलॉजी में एमएससी,कंप्यूटर विज्ञान में एमएससी और ई-गवर्नेंस में पीजी डिप्लोमा के पाठ्यक्रम की खाली बची सीटों पर मौके पर ही प्रवेश दिया जाएगा।

डीयूके का परिसर तिरुवनंतपुरम के टेक्नोसिटी में है और यह परिसर में भी परास्नातक पाठ्यक्रमों की पेशकश करता है। इसकी स्थापना केरल सरकार ने की है। बयान के मुताबिक विद्यार्थी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन पंजीकरण चार अक्टूबर दोपहर दो बजे तक करा सकते हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Open in App

संबंधित खबरें

भारत3 दिन के भारत दौरे पर बांग्लादेशी विदेश मंत्री, क्या सुलझेंगे पुराने मुद्दे? जानें क्या मुद्दे शामिल

क्राइम अलर्टTamil Nadu: 6 साल बाद मिला न्याय! पिता-पुत्र की हिरासत में मौत केस में 9 पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड

विश्वVIDEO: पनामा नहर के पास ब्लास्ट, आसमान में दिखा धुएं का गुबार, कई घायल

कारोबारPetrol, Diesel Price Today: ईंधन की कीमतों ने बढ़ाई टेंशन! क्या भारत में महंगा हो गया पेट्रोल और डीजल? जानें

क्राइम अलर्टकोई इतना अमानवीय और क्रूर कैसे हो सकता है?

भारत अधिक खबरें

भारतWest Bengal: विधानसभा चुनावों से पहले बंगाल की वोटर लिस्ट से करीब 90 लाख नाम हटाए गए

भारतAssam Opinion Poll 2026: बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए और भी बड़े बहुमत के साथ सत्ता में बना रहेगा, Matrize का अनुमान

भारतयूपी में सरकारी वकीलों की फीस 50% तक बढ़ाएगी सरकार, सरकारी खजाने पर बढ़ेगा 120 करोड़ रुपए का बोझ

भारत'मेरे पति 40 साल के हैं, मैं 19 की': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में महिला ने अपने प्रेमी के साथ रहने का अधिकार जीता

भारत'IIT बाबा' अभय सिंह ने कर्नाटक की इंजीनियर से शादी की, पत्नी के साथ हरियाणा में अपने पैतृक गांव पहुंचे