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सहायक आरक्षक आंदोलन पर, परिजनों के साथ कथित मारपीट का कर रहे हैं विरोध

By भाषा | Updated: December 10, 2021 01:49 IST

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बीजापुर (छत्तीसगढ़), नौ दिसंबर राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात सहायक आरक्षकों ने राजधानी रायपुर में प्रदर्शन के दौरान अपने परिवार के सदस्यों के साथ कथित मारपीट की घटना को लेकर बीजापुर जिला मुख्यालय में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

बीजापुर जिले में सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो के अनुसार, जिले के सहायक आरक्षकों ने अपने हथियार संबंधित थानों में जमा कर पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने धरना शुरू कर दिया है। सहायक आरक्षक अपने लिए बेहतर वेतन और पदोन्नति की मांग कर रहे हैं।

राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात इन जवानों के परिजन सोमवार को रायपुर पहुंचे थे तथा अपनी मांगों लेकर नवा रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय का घेराव करके की कोशिश की थी।

सोमवार को प्रदर्शन के दौरान सहायक आरक्षकों के परिजनों ने बताया था कि पुलिस मुख्यालय पहुंचने से पहले ही उन्हें पुलिस ने रोक लिया था और उन्हें रायपुर स्थित माधवराव सप्रे शाला मैदान ले जाया गया। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस दौरान पुलिस कर्मियों ने उनपर हल्का बल प्रयोग भी किया।

हालांकि पुलिस अधिकारियों ने आंदोलनकारियों को हिरासत में लिए जाने और लाठी चार्ज की खबरों का खंडन किया था।

सहायक आरक्षकों के परिवार के प्रदर्शन के बाद बुधवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पुलिस परिवार की मांगों पर विचार करने के लिए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक हिमांशु गुप्ता की अध्यक्षता में एक सशक्त समिति बनाने का आदेश दिया है।

पुलिस परिवार के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे उज्जवल दीवान ने बताया कि मुख्यमंत्री ने हमारी 45-सूत्रीय मांगों को पूरा करने के लिए समिति बनाने की घोषणा की है, इसके बाद हमने रायपुर में विरोध प्रदर्शन बंद कर दिया है। लेकिन बीजापुर में लगभग एक हजार जवान बुधवार से धरने पर बैठ गए हैं। वह रायपुर में प्रदर्शन के दौरान अपने परिवारों के साथ किए गए कथित लाठी चार्ज का विरोध कर रहे हैं। दीवान ने कहा कि वह आज रात बीजापुर पहुंचेंगे तथा प्रदर्शनकारी जवानों से बात करेंगे।

बीजापुर जिला मुख्यालय में बृहस्पतिवार शाम तक धरनास्थल में बड़ी संख्या में महिलाओं समेत, सहायक आरक्षक और गोपनीय सैनिक मौजूद थे। धरना प्रदर्शन में मौजूद एक महिला सहायक आरक्षक ने कहा कि रायपुर में (सोमवार को विरोध के दौरान) हमारे परिवार के सदस्यों पर पुलिस द्वारा हमला किया गया। अगर पुलिस खुद अपने साथियों के परिवारों का दर्द नहीं समझेगी तो कौन समझेगा।

महिला सहायक आरक्षक ने कहा कि हम नक्सल विरोधी अभियानों में हमेशा सबसे आगे रहते हैं। हम अपनी ड्यूटी पूरी लगन से करते आ रहे हैं, लेकिन हमें हर महीने 15 हजार रुपए ही मिलते हैं। इसे बढ़ाया जाना चाहिए और हमें आरक्षक के रूप में पदोन्नत किया जाना चाहिए।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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