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ओमीक्रोन चिंता : राज्य मामलों का शीघ्र पता लगाने के साथ ही जांच बढ़ाएं : केंद्र

By भाषा | Updated: November 30, 2021 22:26 IST

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नयी दिल्ली, 30 नवंबर कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमीक्रोन को लेकर केंद्र ने राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को जांच में तेजी लाने और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की प्रभावी निगरानी करने की मंगलवार को सलाह दी। केंद्र ने साथ ही कहा कि ऐसा नहीं है कि सार्स-सीओवी-2 का ओमीक्रोन स्वरूप आरटी-पीसीआर और आरएटी जांच की पकड़ में नहीं आता। केंद्र ने यह भी कहा कि ओमीक्रोन स्वरूप का कोई मामला अभी देश में सामने नहीं आया है।

कोरोना वायरस के ओमीक्रोन स्वरूप के मामले कई देशों में सामने आने के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ डिजिटल तरीके से एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में कोविड-19 के खिलाफ जनस्वास्थ्य प्रतिक्रिया उपायों और तैयारियों की समीक्षा की गई।

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि यह दोहराते हुए कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संशोधित दिशानिर्देशों और अंतरराष्ट्रीय यात्रा परामर्श को राज्यों के साथ साझा किया गया है, भूषण ने राज्यों को सलाह दी कि वे अपने बचाव उपायों को कम न करें और विभिन्न हवाई अड्डों, बंदरगाहों और सीमापार बिंदुओं से देश में आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों पर कड़ी निगरानी रखें।

इसके अलावा, कोविड-19 के खिलाफ एक शक्तिशाली बचाव के तौर पर टीकाकरण की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए, नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ वी. के. पॉल ने कहा कि 'हर घर दस्तक' टीकाकरण अभियान को 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस अभियान में जोर पहली खुराक के 100 प्रतिशत कवरेज और दूसरी खुराक नहीं लेने वालों को टीका लगाने पर केंद्रित होगा।

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को संसद में कहा कि अभी तक देश में कोरोना वायरस के नये स्वरूप ओमीक्रोन का कोई मामला सामने नहीं आया है और सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए सभी संभव कदम उठा रही है कि यह देश में नहीं पहुंचे।

मांडविया ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान विभिन्न पूरक सवालों का जवाब देते हुए कहा कि केंद्र ने वैश्विक घटनाक्रमों को देखते हुए इस संबंध में परामर्श जारी किया है और हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि संदिग्ध मामलों का जीनोम अनुक्रमण भी किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘ओमीक्रोन स्वरूप के मामले अब 14 देशों में पाये गए हैं। यहां इसका अध्ययन किया जा रहा है, हालांकि भारत में इसका कोई मामला सामने नहीं आया है।’’

भूषण की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्यों को विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की प्रभावी निगरानी करने की सलाह दी गई।

भूषण ने इस बात पर जोर दिया कि ‘‘जोखिम वाले’’ देशों से आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों और विशिष्ट श्रेणी के यात्रियों के नमूने की पहले दिन और आठवें दिन जांच ईमानदारी से की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि ‘‘जोखिम वाले’’ देशों के अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को आरटी-पीसीआर की जांच रिपोर्ट उपलब्ध होने तक हवाई अड्डों पर इंतजार करने के लिए तैयार रहने की सलाह दी जा रही है।

बयान में कहा गया है कि राज्यों को सभी पॉजिटिव नमूनों को जीनोम अनुक्रमण के लिए आईएनएसएसीओजी (इंडियन सार्स-सीओवी-2 कंसोर्टियम ऑन जिनोमिक्स) प्रयोगशालाओं को तुरंत भेजने के लिए कहा गया है। साथ ही राज्यों को यह भी कहा गया है कि संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आये व्यक्तियों का पता लगाना चाहिए और 14 दिन बाद अनुवर्ती कार्रवाई करनी चाहिए।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने बताया कि ऐसा नहीं है कि ओमीक्रोन स्वरूप आरटी-पीसीआर और आरएटी जांच की पकड़ में नहीं आता और इसलिए, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सलाह दी गई थी कि वे किसी भी मामले की शीघ्र पहचान के लिए जांच तेज करें।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने राज्यों से जांच दिशानिर्देशों को सख्ती से लागू करते हुए जांच बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और आरटी-पीसीआर अनुपात को बनाए रखते हुए प्रत्येक जिले में पर्याप्त जांच सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उन क्षेत्रों की निरंतर निगरानी करने की सलाह दी गई जहां हाल ही में संक्रमित मामले सामने आए हैं। उन्हें कहा गया है कि सभी पॉजिटिव मामलों के नमूनों को शीध्र जीनोम अनुक्रमण के लिए निर्दिष्ट आईएनएसएसीओजी लैब में भेजें। उन्हें "जोखिम वाले" देशों के यात्रियों के घरों का भौतिक दौरा करके घर पर पृथकवास वाले मामलों की प्रभावी और नियमित निगरानी करने के लिए कहा गया है।

भूषण ने कहा कि आठवें दिन जांच के बाद निगेटिव पाये गए व्यक्तियों की स्थिति की भी राज्य प्रशासन द्वारा भौतिक निगरानी की जानी है। इसमें कहा गया है, ‘‘राज्यों को स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे (आईसीयू, आक्सीजन आपूर्ति वाले बिस्तर, वेंटिलेटर, आदि की उपलब्धता) की तैयारी सुनिश्चित करने और ग्रामीण क्षेत्रों और बाल चिकित्सा मामलों पर ध्यान देने के साथ आपातकालीन प्रतिक्रिया एवं स्वास्थ्य प्रणाली तैयारी (ईसीआरपी-द्वितीय) को लागू करने के लिए भी कहा गया है।’’

उन्हें स्वीकृत प्रेशर स्विंग एड्सॉर्पशन (पीएसए) ऑक्सीजन उत्पन्न करने वाले संयंत्रों के शीघ्र कार्यान्वयन के लिए काम करने के साथ-साथ साजोसामान, दवाओं, आक्सीजन सिलेंडर आदि की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

राज्यों को सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के विवरण सहित संक्रमित यात्रियों की सूची के लिए हवाईअड्डा स्वास्थ्य अधिकारियों (एपीएचओ) और 'एयर सुविधा' पोर्टल के साथ समन्वय करने और प्रभावी निगरानी के लिए उनके समर्थन को मजबूत करने के लिए कहा गया है।

राज्य प्रशासन, बीओआई अधिकारियों, एपीएचओ, पोर्ट स्वास्थ्य अधिकारियों (पीएचओ) और लैंड बार्डर क्रासिंग आफिसर (एलबीसीओ) के बीच प्रभावी और समय पर समन्वय पर बल दिया गया है।

अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए आज मध्यरात्रि से लागू होने वाले नये दिशानिर्देशों का सुचारू रूप से कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए राज्यों को संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक करने की सलाह दी गई है।

देश में किसी भी वीओसी के प्रसार का पता लगाने और उस पर नजर रखने के लिए राज्य निगरानी अधिकारी द्वारा दैनिक निगरानी के लिए निर्देशित किया गया है।

इसमें कहा गया है कि विज्ञान आधारित जानकारी के नियमित प्रसार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के माध्यम से जनता के साथ साझा किया जाना चाहिए।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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