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तमिलनाडु के 1500 लोगों ने लिया था निजामुद्दीन मरकज में हिस्सा, अब तक सिर्फ 515 लोगों की हो सकी है पहचान, बाकी गायब

By भाषा | Updated: April 1, 2020 16:28 IST

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने निजामुद्दीन धार्मक सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए गए 1,500 लोगों में से 1,131 लौट आए हैं। कुल 515 लोगों की पहचान की गई है।

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ठळक मुद्देतमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने कहा कि तबलीगी जमात के कुछ लोगों की जानकारी अब भी नहीं मिली है। मुख्यमंत्री ने ऐसे लोगों से अपील की है कि वह अधिकारियों के संपर्क में आएं, ताकि उनकी जांच हो सके।

चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने बुधवार को कहा कि दिल्ली के निजामुद्दीन में एक धार्मिक सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले तबलीगी जमात के कुछ लोगों की जानकारी अब भी नहीं मिली है। उन्होंने ऐसे लोगों से अपील की है कि वह अधिकारियों के संपर्क में आएं, ताकि उनकी जांच हो सके। राष्ट्रीय राजधानी में इस धार्मिक सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले कई लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए गए 1,500 लोगों में से 1,131 लौट आए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कुल 515 लोगों की पहचान की गई है… अन्य जिन्होंने भी इस सम्मेलन में हिस्सा लिया है उन्हें अधिकारियों के संपर्क में आना चाहिए, क्योंकि हमारे पास इन लोगों के पते नहीं है।’’

पलानीस्वामी ने संवाददाताओं को बताया कि एक वर्ग से अब भी संपर्क नहीं हो पाया है, जबकि अन्य अभी दिल्ली में पृथक करके रखे गए हैं। इस सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले 50 लोग मंगलवार को संक्रमित पाए गए और राज्य में कुल संक्रमित लोगों की संख्या 124 तक पहुंच गई है।

उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के खतरे और समाज के बड़े तबके पर इसके विपरित प्रभाव को देखते हुए वापस आए लोगों को अधिकारियों से मिलना चाहिए ताकि उनकी जांच हो सके और जरूरत पड़ने पर उनका इलाज हो सके।

वहीं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन तमिलनाडु ने भी कहा है कि तबलीगी जमात समाज को तत्काल 7824849263/044 46274411 इस नंबर पर फोन करके स्वास्थ्य अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए वहीं उनसे जब पूछा गया कि क्या इशा योगा के कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों की भी जांच होगी तो उन्होंने कहा कि अगर लक्षण दिखेंगे तो जांच होगी। पलानीस्वामी ने अम्मा कैंटीन के कामकाज की भी जांच की और अच्छी गुणवत्ता का सस्ता खाना लोगों को देने के लिए कैंटीनों की सराहना की।

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