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एनएससीएन-के ने संघर्षवराम की घोषणा की, शांतिवार्ता के लिए केंद्र से किया संपर्क

By भाषा | Updated: December 23, 2020 18:58 IST

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कोहिमा, 23 दिसंबर नगा उग्रवादी संगठन एनएससीएन-के ने बुधवार को संघर्ष विराम की घोषणा की और कहा कि उसने शांति वार्ता शुरू करने के लिए केंद्र सरकार से संपर्क किया है।

इस उग्रवादी संगठन का नेतृत्व दुर्दांत उग्रवादी निकी सुमी कर रहा है।

एनएससीएन-के ने 2001 में केंद्र के साथ एक संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर किया था लेकिन 2015 में एकपक्षीय तरीके से इसे तोड़ दिया, जब संगठन के तत्कालीन प्रमुख एस एस खापलांग जीवित थे।

मणिपुर में 2015 में भारतीय थल सेना के 18 सैनिकों की हत्या के मामले में सुमी मुख्य आरोपी है और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) उसके सिर पर 10 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की थी।

सुमी ने एक बयान में कहा कि एनएससीएन-के इन वर्षों में नगा मुद्दे का सम्मानजनक और स्वीकार्य राजनीतिक समाधान ढूंढने के लिए प्रयासरत रहा तथा संगठन काफी समय से लंबित इस विषय के शीघ्र समाधान के लिए नगा लोगों की गहरी भावनाओं से भी अवगत है।

बयान में कहा गया है कि एनएससीएन-के इस बात से अवगत है कि केंद्र सरकार ने सभी हितधारकों की भागीदारी के साथ नगा मुद्दे का एक अंतिम एवं टिकाऊ समाधान तलाशने के लिए हाल के समय में ‘‘गंभीर और वास्तविक’’ कोशिशें की हैं।

बयान में कहा गया है, ‘‘इसलिए, संगठन ने इस अहम मोड़ पर शांति प्रक्रिया को मजबूत करने और उसका समर्थन करने का संकल्प लिया है। हमारे नेताओं ने इस सिलसिले में भारत सरकार के अधिकारियों से संपर्क स्थापित किया है। ’’

बयान में कहा गया है, ‘‘प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए और नगा लोगों, खासतौर पर नगा सिविल सोसाइटी संगठनों और गैर सरकारी संस्थाओं (एनजीओ) की आकांक्षा को ध्यान में रखते हुए एनएससीएन ने 2015 में संघर्ष विराम समझौते को एकपक्षीय तरीके से तोड़ने के पूर्व के फैसले को रद्द करते हुए इस समझौते को तत्काल प्रभाव से फिर से लागू करने का फैसला किया है।’’

संगठन ने कहा कि उसे उम्मीद है कि केंद्र सरकार नगालैंड में शांति और नगा लोगों के व्यापक हितों का लेकर विश्वास बहाली उपाय के तौर पर उसके फैसले का सम्मान करते हुए सकारात्मक जवाब देगी।

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि भारतीय मूल के लोगों एवं कैडर द्वारा म्यामां से संचालित किया जाने वाला यह अंतिम (उग्रवादी) संगठन है।

अधिकारी ने कहा कि उनके शांति प्रक्रिया में शामिल होने से नगा शांति प्रक्रिया में तेजी आएगी क्योंकि एनएससीएन-के का शेष हिस्सा म्यामां केंद्रित है और सरकार के लिए वह प्रासंगिक नहीं है।

अन्य प्रमुख संगठन--एनएससीएन-आईएम ने 1997 में केंद्र सरकार के साथ एक संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर किया था और इसके बाद शांति वार्ताओं में शामिल हुआ था।

एनएससीएन-आईएम ने मुद्दे का स्थायी हल निकालने के लिए तीन अगस्त 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में एक प्रारूप समझौते पर हस्ताक्षर किया था। यह समझौता 18 साल तक चली 80 से अधिक दौर की बातचीत के बाद हुआ था।

हालांकि, एनएससीएन-आईएम के साथ वार्ता अभी जारी है। वहीं, अलग नगा ध्वज और संविधान की इस संगठन की मांग केंद्र सरकार खारिज कर चुकी है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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