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राजनीति में घमंड किसी का नहीं रहता : गहलोत

By भाषा | Updated: August 15, 2021 15:52 IST

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जयपुर, 15 अगस्त राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर यहां सवाई मान सिंह स्टेडियम में राज्यस्तरीय समारोह में ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में केन्द्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि घमंड की राजनीति ज्यादा लंबे समय नहीं चलेगी और जनता समय आने पर सबक सिखाएगी।

गहलोत ने केंद्र पर आरोप लगाया कि न्यायपालिका, आयकर विभाग, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) सब पर दबाव है और राजनीतिक मकसद की पूर्ति के लिए छापे डलवाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इतने घंमड में नहीं रहना चाहिए.. जनता सब समझती है.. घमंड राजनीति में किसी का नहीं रहता.. जनता बहुत समझदार है..देश की जनता समय आने पर सबक सिखाएगी।’’

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘यह देश ऐसे ही अंखड नहीं रहा है। 74 साल के दौरान दो-दो प्रधानमंत्रियों की शहादत हुई है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी शहीद हो गईं, लेकिन खालिस्तान नहीं बनने दिया। राजीव गांधी शहीद हो गए...यह देश ऐसे ही अंखड नहीं रहा है।’’

गहलोत ने कहा, ‘‘ चाहे विधायक, सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री हो या कोई भी हो, अगर शपथ के अनुसार आचरण करेंगे, व्यवहार करेंगे, सोच रखेंगे, फैसले करेंगे तो देश में कोई दिक्कत नहीं आएगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ये (केंद्र में सत्ता पक्ष) ऐसे लोग हैं जिन्होंने यह तय कर रखा है कि वे हठधर्मिता से राज करेंगे और परवाह किसी की नहीं करेंगे। चाहे कोरोना प्रबंधन का मामला हो, या टीकाकरण का मामला हो, आज पूरा देश दुखी है।’’

गहलोत ने कहा, ‘‘ये (आजादी के) 75वें वर्ष का अवसर आया है, इसमें हम लोग संकल्प लें कि हम संविधान की रक्षा करेंगे।’’

वहीं, प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने केन्द्र सरकार पर हमला करते हुए कहा, ‘‘आज देश में ऐसी ताकतें केन्द्रीय सत्ता में बैठी हैं जिनका लोकतंत्र में विश्वास नहीं है तथा बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा प्रदत्त संविधान के तहत निर्मित संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर उनकी स्वायत्तता का हनन कर रही हैं।’’ उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के साथ असहमति व्यक्त करने पर देशद्रोही करार दिया जाने लगा है जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि देश का अन्नदाता किसान 10 माह से तीन काले कृषि कानूनों को वापस लेने की माँग को लेकर सडक़ों पर संघर्ष कर रहा है, किन्तु केन्द्र सरकार द्वारा समाधान निकालने की जगह आंदोलन को दबाने के हथकण्डे अपनाए जा रहे हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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