दिल्ली चले नीतीश कुमार, बिहार में भाजपा सरकार, तेजस्वी यादव बढ़ाएंगे सक्रियता!, जनता से करेंगे संवाद, 2030 में बीजेपी से टक्कर?
By एस पी सिन्हा | Updated: April 10, 2026 16:14 IST2026-04-10T16:12:30+5:302026-04-10T16:14:36+5:30
सूत्रों की मानें तो राजद का मानना है कि नीतीश कुमार की बिहार से विदाई के बाद अब सियासी मुकाबला मुख्य रूप से राजद और भाजपा के बीच ही होगा।

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पटनाः बिहार में सत्ता हस्तांतरण की तैयारियों के बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी पूरी तरह सक्रिय मोड में नजर आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार नई सरकार के गठन के बाद तेजस्वी यादव राज्यव्यापी दौरे पर निकल सकते हैं। इस दौरान वह न सिर्फ आम जनता से संवाद करेंगे, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर संगठन को और धारदार बनाने की रणनीति तैयार करेंगे। सूत्रों की मानें तो राजद का मानना है कि नीतीश कुमार की बिहार से विदाई के बाद अब सियासी मुकाबला मुख्य रूप से राजद और भाजपा के बीच ही होगा।
जानकारों की मानें तो जदयू का जनाधार कमजोर होना मानकर तेजस्वी अभी से एक नई सियासी बिसात बिछाने को आमदा हैं। तेजस्वी यादव फिलहाल राजद के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और पार्टी को अगले चुनावों के लिए अभी से तैयार करने में जुटे हैं। बिहार विधानसभा में वर्तमान में राजद के 25 विधायक हैं।
ऐसे में पार्टी की कोशिश है कि अपने कोर वोट बैंक यादव और मुस्लिम पर पकड़ को और मजबूत किया जाए। 2025 के विधानसभा चुनाव में राजद को मिली करारी हार के पीछे राजद से उसके परम्परागत वोटरों का दूर होना एक बड़ा कारण माना गया। सियासत के जानकारों की मानें तो 2025 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटों का एक हिस्सा असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम की ओर झुकता दिखा, जिससे राजद को कुछ सीटों पर नुकसान उठाना पड़ा। यही वजह है कि अब तेजस्वी यादव मुस्लिम समुदाय के बीच फिर से विश्वास मजबूत करने पर जोर दे सकते हैं।
वहीं राजद की छवि वे एक ऐसे दल के रूप में गढ़ना चाहते हैं जिसे लेकर सभी वर्गों में भरोसा जगे। वहीं, नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से अलग होने के बाद राज्य की राजनीति में पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के वोटों को लेकर भी नई प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। अब तक इन वर्गों पर नीतीश कुमार की मजबूत पकड़ मानी जाती थी,
लेकिन उनके हटने के बाद राजद इन वोटरों को अपने पक्ष में करने की रणनीति पर काम कर रही है। तेजस्वी को खुद को इन वर्गों के बीच एक विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर सकते हैं। तेजस्वी यादव का प्रस्तावित दौरा इसी सियासी जमीन को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।