निर्भया गैंगरेप के दोषी 22 जनवरी को फंदे पर झूलेंगे, गुनहगारों के वकील ने कहा- सुप्रीम कोर्ट में दायर करेंगे क्यूरेटिव पिटीशन

By रामदीप मिश्रा | Updated: January 7, 2020 17:16 IST2020-01-07T17:15:07+5:302020-01-07T17:16:04+5:30

साल 2012 के 16 दिसंबर को एक चलती बस में निर्भया (बदला हुआ नाम) के साथ सामूहिक गैंगरेप हुआ था। आरोपियों ने पीड़िता के साथ ना सिर्फ बलात्कार किया बल्कि उसे बेहद चोटें भी पहुंचाई थी। जिसकी वजह से निर्भया की मौत हो गई। इस घटना के विरोध में पूरे देश में उग्र व शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुए। 

Nirbhaya case: We will file curative petition in Supreme Court says convicts' lawyer AP Singh | निर्भया गैंगरेप के दोषी 22 जनवरी को फंदे पर झूलेंगे, गुनहगारों के वकील ने कहा- सुप्रीम कोर्ट में दायर करेंगे क्यूरेटिव पिटीशन

Photo ANI

Highlightsनिर्भया गैंगरेप मामले के दोषियों को 22 जनवरी की सुबह सात बजे फंदे से लटकाया जाएगा।सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दायर की जाएगी।

निर्भया गैंगरेप मामले के दोषियों को 22 जनवरी की सुबह सात बजे फंदे से लटकाया जाएगा। उन्हें तिहाड़ जेल में फांसी दी जाएगी। दिल्ली की पटियाला हाउस कार्ट के आदेश के बाद दोषियों के वकील ने दावा किया है कि वह अब सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दायर करेंगे।

समचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, निर्भया मामले में दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दायर करेंगे। बता दें, दिल्ली की पटियाला हाउस कार्ट ने चारों दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी किया है। 


इससे पहले निर्भया गैंगरेप मामले में फांसी की सजा पाने वाले चार दोषियों में से एक के पिता की फांसी को टालने की कोशिश भी सोमवार को बेकार हो गई थी। पिछले एक महीने के दौरान तकरीबन तीन याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और पटियाला हाउस कोर्ट से खारिज हो चुकी हैं।

क्या है क्यूरेटिव पिटीशन?

दरअसल,  2002 में सुप्रीम कोर्ट में एक दंपति रुपा अशोक हुरा के मामले की सुनवाई हुई थी। उस दौरान यह सवाल उठा था कि क्या शीर्ष अदालत के द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद भी किसी गुनहगार को उसके बचाव का मौका मिल सकता है? आम तौर पर ऐसे मामले में दोषी पुर्नविचार याचिका दायर करता है लेकिन सवाल यह था कि अगर पुर्नविचार याचिका भी खारिज कर दी जाती है तो दोषी के पास क्या विकल्प बचता है? इसके बाद सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले को दुरुस्त करने और उसे गलत क्रियान्वन से बचाने की संभावना के मद्देनजर उपचारात्मक याचिका की धारणा लेकर आया, जिसे अंग्रेजी में क्यूरेटिव पिटीशन कहते हैं। इसमें क्यूरेटिव का मतलब क्योर से ही है, जिसका मतलब उपचार से होता है। यह याचिका किसी भी दोषी के पास उसके बचाव के लिए अंतिम विकल्प है। 

सुप्रीम कोर्ट से रिव्यू पिटीशन यानी पुर्नविचार याचिका और राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज किए जाने के बाद दोषी के पास क्यूरेटिव पिटीशन का विकल्प होता है। क्यूरेटिव पिटीशन दायर करने के लिए याचिकाकर्ता को अदालत को बताना होता है कि वह किस आधार पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दे रहा है। क्यूरेटिव पिटीशन किसी वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा प्रमाणित होना जरूरी होता है। सुप्रीम कोर्ट के तीन वरिष्ठ न्यायमूर्ति और फैसला सुनाने वाले न्यायमूर्तियों के पास भी इस याचिका को भेजा जाना जरूरी होता है। पीठ के ज्यादातर न्यायमूर्ति अगर तय करते हैं कि मामले की दोबारा सुनवाई होनी चाहिए तब क्यूरेटिव पिटीशन को फिर से फैसला सुना चुके न्यायमूर्तियों के पास भेज दिया जाता है।

जानें निर्भया केस के बारे में 

साल 2012 के 16 दिसंबर को एक चलती बस में निर्भया (बदला हुआ नाम) के साथ सामूहिक गैंगरेप हुआ था। आरोपियों ने पीड़िता के साथ ना सिर्फ बलात्कार किया बल्कि उसे बेहद चोटें भी पहुंचाई थी। जिसकी वजह से निर्भया की मौत हो गई। इस घटना के विरोध में पूरे देश में उग्र व शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुए। 

इस केस में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। जिसमें से 11 मार्च 2013 को राम सिंह नामक मुख्य आरोपी ने सुबह तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी। एक और आरोपी नाबालिग था। जिसे कार्रवाई के बाद सुधार गृह में भेज दिया गया। इसके अलावा बाकी चारों आरोपी अक्षय कुमार सिंह, विनय शर्मा, मुकेश और पवन गुप्ता चारों ही तिहाड़ जेल में बंद हैं। इन चारों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई है।

Web Title: Nirbhaya case: We will file curative petition in Supreme Court says convicts' lawyer AP Singh

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