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हाइड्रोजन उत्पादन का नया तरीका ईंधन उत्पादन के दौरान ऊर्जा खपत के लिहाज से किफायती

By भाषा | Updated: August 4, 2021 21:42 IST

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नयी दिल्ली, चार अगस्त भारतीय अनुसंधानकर्ताओं ने हाइड्रोजन उत्पादन का नवोन्मेषी तरीका खोजा है जिससे इसका उत्पादन तीन गुना तक बढ़ सकता है और इसके उत्पादन में कम ऊर्जा की भी जरूरत होगी। डीएसटी ने बुधवार को कहा कि इससे कम लागत पर पर्यावरण अनुकूल हाइड्रोजन ईंधन के उत्पादन का रास्ता साफ हो सकता है।

हरित और स्थायी अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने में हाइड्रोजन ईंधन अहम भूमिका निभा सकता है क्योंकि पर्यावरण अनुकूल होने के साथ-साथ पारंपरिक गैर नवीनीकरण ईंधन स्रोतों जैसे कोयला और पेट्रोलियम के मुकाबले तीन गुना अधिक ऊर्जा देता है। हाइड्रोजन ईंधन के इस्तेमाल से उप उत्पाद के रूप में पानी निकलता है जो पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त है।

पृथ्वी के वायुमंडल में हाइड्रोजन की कम मात्रा होने की वजह से बिजली की मदद से पानी के अणुओं को खंडित कर इसका उत्पादन किया जाता है जिसे इलेक्ट्रोलिसिस कहते हैं।इस प्रक्रिया के लिए अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है जबकि हाइड्रोजन उत्पादन की दर कम होती है। इलेक्ट्रालिसिस के दौरान महंगे प्लैटियम और इरिडियम आधारित उत्प्रेरक के इस्तेमाल भी हाइड्रोजन ईंधन के वाणिज्यिक आधार पर उत्पादन को हतोत्साहित करता है।

विज्ञान-प्रौद्योगिकी विभाग ने बयान में कहा कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बंबई के अनुसंधानकर्ताओं की टीम ने सी सुब्रमण्यम के नेतृत्व में उपरोक्त सभी चुनौतियों के समाधान के लिए नवोन्मेषी तरीके के साथ सामने आई है। बयान के मुताबिक इसमें जल के विद्युत अपघटन (इलेक्ट्रोलिसिस) के लिए बाह्य चुबंकीय क्षेत्र शामिल होता है। पुरानी पद्धति में एक मिलीलीटर हाइड्रोजन गैस का उत्पादन करने में जितनी ऊर्जा की जरूरत होती है उससे 19 प्रतिशत कम ऊर्जा में तीन मिलीलीटर हाइड्रोजन का उत्पादन नए तरीके से किया जा सकता है। यह सफलता उत्प्रेक स्थल पर विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र में तारतम्यता स्थापित कर हासिल की जा सकती है।

बयान में कहा कि इस तरीके से मौजूदा इलेक्ट्रोलाइस्ड (पानी को ऑक्सीजन और हाइड्रोजन में खंडित करने के लिए विद्युत का इस्तेमाल करता है) के डिजाइन में बिना बदलाव किया बाह्य चुंबक को जोड़ा जा सकता है, हाइड्रोजन उत्पादन की कुशलता बढ़ सकती है।

बयान में कहा गया कि हाइड्रोजन उत्पादन के इस सिद्धांत को प्रदर्शित करने वाले अनुसंधान पत्र को एसीएस सस्टेनेबल केमिस्ट्री ऐंड इंजीनियरिंग में प्रकाशित किया गया है।

डीएसटी ने कहा कि यह ऐसी प्रणाली है जिसमें बाहरी चुबंकीय क्षेत्र की निरंतर जरूरत नहीं होती और लंबे समय तक चुंबकीय क्षेत्र बना रहता हैं। इसके लिए जरूरी चुंबकीय क्षेत्र फ्रीज के चुंबक जितनी क्षमता वाला चुंबक भी मुहैया करा सकता है। इस नयी पद्धति से 10 मिनट के लिए स्थापित बाह्य चुंबकीय क्षेत्र 45 मिनट तक उच्च हाइड्रोजन उत्पादन स्तर के लिए पर्याप्त है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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