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नए अध्ययन में आकाशगंगा में नए तारों के बारे में पता चला

By भाषा | Updated: July 23, 2021 18:34 IST

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बेंगलुरु, 23 जुलाई खगोलशास्त्रियों के एक अंतरराष्ट्रीय दल ने आकाशगंगा का एक नया गहन सर्वेक्षण किया, जिसमें ऐसे तारों के बारे में सूक्ष्मता से पता चला,जो पहले नहीं देखे गए थे। साथ ही इस बात का भी पता चला कि किस प्रकार से तारे बनते हैं और फिर समाप्त हो जाते हैं।

यह अध्ययन ‘एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स’ में कई पेपरों में प्रकाशित हुआ। इस अध्ययन दल में ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस’ (आईआईएससी) और ‘इडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी’(आईआईएसटी) के वैज्ञानिक भी शामिल हैं।

सर्वेक्षण के लिए आंकड़ें दो बड़े शक्तिशाली रेडियो टेलिस्कोप के जरिए जुटाए गए थे। अमेरिका के ‘नेशनल रेडियो एस्ट्रोनॉमी ऑब्जर्वेटरी’ में ‘कार्ल जी जांस्की वेरी लार्ज एरे’ (वीएलए), और ग्लोस्टार के हिस्से के रूप में ‘मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर रेडियो एस्ट्रोनॉमी’ जर्मनी द्वारा संचालित ‘एफेल्सबर्ग 100-मीटर रेडियो टेलीस्को।’

बेंगलुरु के आईआईएससी ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि भौतिक विज्ञान विभाग में सहायक प्रोफेसर निरुपम रॉय और आईआईएससी से उनके पूर्व स्नातक छात्र रोहित डोकारा, साथ ही आईआईएसटी में पृथ्वी और अंतरिक्ष विज्ञान विभाग में सहायक प्रोफेसर जगदीप डी पांडियन उन भारतीय वैज्ञानिकों में शामिल हैं जो ग्लोस्टार परियोजना का हिस्सा हैं।

डोकारा पहले लेखक हैं जिन्होंने अपने पेपर में हमारी गैलेक्सी में बड़ी संख्या में तारों के विस्फोट के बाद टूटने से नए तारे के अवशेष (एसएनआरएस) संरचनाओं के बारे में पता लगने की जानकारी दी है।

बयान में कहा गया कि इससे पहले के सर्वेक्षणों में आकाशगंगा में एसएनआरएस की अनुमानित संख्या का केवल एक तिहाई जो करीब 1000 है, के बारे में पता लाया गया था। ग्लोस्टार की टीम ने अब 80 नए एसएनआर का पता वीएलए के जरिए लगाया है,वहीं ‘एफेल्सबर्ग ग्रांड वीएलए’ के संयुक्त आंकडों से और एसएनआरएस के बारे में पता चल सकता है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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