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नौसेना लीक मामला: सीबीआई ने नौसेना के दो कमांडरों, चार अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया

By भाषा | Updated: November 2, 2021 20:15 IST

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नयी दिल्ली, दो नवंबर केंद्रीय अन्वेषण अभिकरण (सीबीआई) ने पनडुब्बी रेट्रो-फिटिंग (उत्पादन के बाद पुर्जा जोड़ने की) परियोजना के संबंधित संवेदनशील सूचना के कथित लीक के मामले में मंगलवार को दो सेवारत नौसेना अधिकारियों सहित छह व्यक्तियों के खिलाफ अपना पहला आरोपपत्र दाखिल किया। यह जानकारी अधिकारियों ने दी।

यह रक्षा भ्रष्टाचार के मामलों में सबसे तेज गति से की जाने वाली जांचों में से एक है क्योंकि एजेंसी ने 3 सितंबर को पहली गिरफ्तारी के 60 दिनों के भीतर ही आरोपपत्र दाखिल कर दिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि गिरफ्तार आरोपियों को आसानी से जमानत न मिले।

सीबीआई को भ्रष्टाचार के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के 60 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल करना होता है अन्यथा वे जमानत के पात्र हो जाते हैं। विशेष अपराध के मामले यह सीमा 90 दिन की है।

राउज एवेन्यू में सीबीआई की एक विशेष अदालत के समक्ष दाखिल अपने आरोपपत्र में, सीबीआई ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधान लगाये हैं।

अधिकारियों ने कहा कि मामला तब शुरू हुआ जब एजेंसी को यह जानकारी मिली कि रूसी किलो क्लास की पनडुब्बियों की रेट्रोफिटिंग पर काम कर रहे नौसेना के पश्चिमी मुख्यालय में सेवारत कुछ अधिकारी नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारियों से कथित तौर पर प्रभावित हो रहे हैं और उन्हें आर्थिक लाभ मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि दो सितंबर को मामला दर्ज करने के बाद सीबीआई ने अगले दिन छापेमारी की, जिस दौरान दो सेवानिवृत्त अधिकारियों कमोडोर रणदीप सिंह और एक कोरियाई पनडुब्बी कंपनी के लिए कार्यरत कमांडर एस जे सिंह को गिरफ्तार किया गया।

सीबीआई ने आगे की छापेमारी के दौरान, एक सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी के आवास से 2 करोड़ रुपये बरामद करने का दावा किया।

उन्होंने बताया कि बाद में जांच के दौरान सीबीआई ने एक सेवारत नौसेना अधिकारी कमांडर अजीत कुमार सिंह और उनके साथ काम कर रहे एक अन्य कमांडर को हिरासत में लिया।

अधिकारियों ने कहा कि एक कथित हवाला डीलर और एक निजी कंपनी के निदेशक को भी जांच के दौरान हिरासत में लिया गया। आरोप है कि सेवारत अधिकारी आर्थिक लाभ के बदले सेवानिवृत्त अधिकारियों को गोपनीय सूचनाएं कथित रूप से लीक कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि आगे की जांच जारी है और कुछ विदेशी नागरिकों की भूमिका जांच के दायरे में है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील और हाई प्रोफाइल भ्रष्टाचार के मामलों को देखने वाली एजेंसी की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई को सूचना लीक होने का पता लगाने का काम सौंपा गया था, जिसके बाद अभियान शुरू किया गया था।

उन्होंने बताया कि इकाई ने गिरफ्तार अधिकारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों के नियमित संपर्क में रहने वाले कई अन्य अधिकारियों और भूतपूर्व सैनिकों से पूछताछ की है।

उन्होंने कहा कि सीबीआई अधिकारियों द्वारा इस्तेमाल किए गए डिजिटल उत्पादों का फोरेंसिक विश्लेषण कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं निहित स्वार्थ वाले लोगों के हाथ में सूचना तो नहीं गई।

नौसेना ने एक बयान में कहा, ‘‘कुछ अनधिकृत कर्मियों द्वारा प्रशासनिक और वाणिज्यिक प्रकृति की कथित सूचना लीक से संबंधित जांच में सामने आयी है और उपयुक्त सरकारी एजेंसी द्वारा इसकी जांच की जा रही है।’’

उसने कहा कि एजेंसी द्वारा नौसेना के पूर्ण सहयोग से जांच जारी है। उसने कहा कि नौसेना द्वारा आंतरिक जांच भी की जा रही है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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