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नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस ने परिसीमन आयोग से भेंट की, निष्पक्ष, पारदर्शी प्रक्रिया का आग्रह किया

By भाषा | Updated: July 6, 2021 22:26 IST

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श्रीनगर, छह जुलाई कश्मीर में राजनीतिक दलों ने परिसीमन आयोग से मंगलवार को मुलाकात कर लोगों की आशंकाओं को दूर करने के लिए निर्वाचन क्षेत्रों के स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पुनर्गठन की कवायद करने का आग्रह किया।

केंद्र शासित प्रदेश में निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन की बड़ी कवायद को लेकर जम्मू कश्मीर के चार दिवसीय दौरे पर आयीं न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले आयोग ने विभिन्न दलों के नेताओं से संवाद किया।

नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी सहित कई दलों ने आयोग के प्रतिनिधिमंडल को अलग-अलग ज्ञापन सौंपा। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस (एएनसी) ने इस कवायद का हिस्सा नहीं बनने का फैसला किया है। पीडीपी ने यह कहा कि ऐसी धारणा है कि प्रक्रिया का परिणाम पूर्व नियोजित है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस ने आयोग को अलग-अलग ज्ञापन सौंपकर कवायद से संबंधित अपनी चिंताओं और मांगों को रेखांकित किया और कहा कि इसे जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा दिए जाने के बाद ही किया जाए।

माकपा ने भी एक ज्ञापन दिया, जिसमें परिसीमन के संवैधानिक पहलुओं और जम्मू कश्मीर पुनर्गठन कानून, 2019 को कानूनी चुनौती पर प्रकाश डाला गया।

आयोग का यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जम्मू-कश्मीर के नेताओं के साथ बैठक करने के कुछ दिनों बाद हुआ है। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा कि परिसीमन कवायद तब तक नहीं की जानी चाहिए जब तक कि उच्चतम न्यायालय जम्मू कश्मीर पुनर्गठन कानून 2019 की संवैधानिक वैधता और अन्य संबंधित आदेशों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला ना कर ले।

आयोग से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता नासिर वानी ने कहा कि पार्टी ने आयोग को बताया कि लोगों का संस्थानों में ‘भरोसा खत्म हो गया है’ और यह आयोग का काम है कि वह इस भरोसे को बहाल करने की कोशिश करे।

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने अपने ज्ञापन में कहा कि यदि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने से पहले परिसीमन प्रक्रिया होती है तो यह कवायद ‘निरर्थक’ हो जाएगी। पार्टी ने कहा कि भारतीय संविधान के चारों स्तंभों के भीतर अपनी लोकतांत्रिक नींव निर्धारित करने के लिए लद्दाख के लोगों की आकांक्षा का गंभीरता से सम्मान किया जाना चाहिए। पार्टी ने यह भी सुझाव दिया कि परिसीमन आयोग ने अगर कोई मसौदा प्रस्ताव तैयार किया है तो उस पर सुझाव देने और आपत्तियां प्रस्तुत करने के लिए सभी राजनीतिक दलों के बीच बांटना चाहिए।

माकपा ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में 2011 की जनगणना को परिसीमन कवायद के लिए मार्गदर्शक प्रारूप के रूप में लिया जाना चाहिए। माकपा नेता गुलाम नबी मलिक द्वारा दिए गए ज्ञापन में कहा गया, ‘‘जम्मू-कश्मीर के दूरदराज के इलाकों में रहने वाली आबादी के उपेक्षित वर्गों को भी उचित प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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