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नंबी नारायणन ने जासूसी मामले में सीबीआई जांच के न्यायालय के आदेश की सराहना की

By भाषा | Updated: April 15, 2021 18:59 IST

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तिरुवनंतपुरम, 15 अप्रैल भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन ने 1994 के जासूसी मामले में पुलिस अधिकारियों की भूमिका के संबंध में एक उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट सीबीआई को सौंपने तथा केंद्रीय जांच एजेंसी को मामले में आगे की जांच करने का निर्देश देने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का बृहस्पतिवार को स्वागत किया।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने जासूसी मामले में नारायणन को पूर्व में ‘क्लीन चिट’ दे दी थी।

पूर्व वैज्ञानिक ने यहां मीडिया से कहा कि केंद्रीय अन्वेषण एजेंसी के पड़ताल पूरी करने और उस रिपोर्ट (उच्चस्तरीय समिति की) के आधार पर कार्रवाई होने के बाद न्याय हो जाएगा।

उनकी टिप्पणी शीर्ष अदालत के आदेश के चंद घंटों के बाद आई।

इससे पहले आज उच्चतम न्यायालय ने संबंधित मामले में दोषी पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया तथा एजेंसी को मामले में आगे और जांच करने का भी निर्देश दिया।

शीर्ष अदालत ने कहा कि सीबीआई समिति के निष्कर्षों को प्रारंभिक जांच का हिस्सा मान सकती है।

न्यायालय ने एजेंसी को तीन माह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

नारायणन ने शीर्ष अदालत के आदेश पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा, ‘‘मैं फैसले का स्वागत करता हूं...यह एक प्रगति हुई है।’’

उन्होंने दोहराया कि उनके खिलाफ जासूसी का समूचा मामला ‘‘गढ़ा गया’’ था।

नारायणन ने कहा, ‘‘यह एक गढ़ा गया अपराध था। सीबीआई की समापन रिपोर्ट में भी यह कहा गया था, तत्कालीन सीजेएम अदालत ने इसे स्वीकार किया था और यह 29 अप्रैल 1998 के उच्चतम न्यायालय के पहले निर्णय में भी रेखांकित किया गया था और फिर सितंबर 2018 के निर्णय में भी।’’

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी यही कहा था और अब प्रयास यह पता करने का है कि मामला किसने ‘‘गढ़ा’’ था।

इस बीच, भाजपा ने शीर्ष अदालत के फैसले का स्वागत किया और कहा कि सीबीआई जांच में कांग्रेस की ‘गुटीय राजनीति’ का सच सामने आ जाएगा।

केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘इसरो जासूसी मामला सीबीआई को सौंपने के माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश का स्वागत करता हूं। उम्मीद है कि इससे सामने आएगा कि केरल कांग्रेस की गुटीय राजनीति ने किस तरह राष्ट्रीय हितों को क्षति पहुंचाई और किस तरह देशभक्त वैज्ञानिक नंबी नारायणन जी का जीवन तबाह कर दिया।’’

उल्लेखनीय है कि इस मामले में नारायणन को शीर्ष अदालत ने बरी करने के साथ ही 50 लाख रुपये का मुआवाजा भी दिलवाया था।

केंद्र ने पांच अप्रैल को, शीर्ष अदालत का रुख कर समिति की रिपोर्ट पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था और इसे “राष्ट्रीय मुद्दा” बताया था।

शीर्ष अदालत ने 14 सितंबर, 2018 को केरल सरकार को नारायणन को 50 लाख रुपये बतौर मुआवजा देने का निर्देश देने के साथ ही इस समिति की नियुक्ति की थी।

जासूसी का यह मामला 1994 का था जो दो वैज्ञानिकों और मालदीव की दो महिलाओं सहित चार अन्य द्वारा भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम पर कुछ गोपनीय दस्तावेजों को दूसरे देशों को दिए जाने के आरोपों से जुड़ा था।

वैज्ञानिक नंबी नारायण को उस वक्त गिरफ्तार किया गया था जब केरल में कांग्रेस की सरकार थी।

नारायणन उस समय इसरो में क्रायोजेनिक परियोजना के तत्कालीन निदेशक थे। उनके साथ इसरो के तत्कालीन उपनिदेशक डी शशिकुमारन को भी गिरफ्तार किया गया था।

तीन सदस्यीय जांच समिति ने हाल ही में शीर्ष अदालत को अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंपी थी।

सीबीआई ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा था कि केरल में तत्कालीन शीर्ष पुलिस अधिकारी ही नारायणन की गैरकानूनी गिरफ्तारी के लिए जिम्मेदार थे।

मामले के राजनीतिक मायने भी थे। कांग्रेस के एक तबके ने मुद्दे को लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री दिवंगत के. करुणाकरण को जिम्मेदार ठहराया था जिन्हें अंतत: इस्तीफा देना पड़ा था।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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