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सेन-पुरी विवाद के संबंध में लिखित में शिकायत मिली तो जांच कर सकते हैं नायडू : सूत्र

By भाषा | Updated: July 23, 2021 22:28 IST

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नयी दिल्ली, 23 जुलाई राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद तृणमूल कांग्रेस नेता शांतनु सेन और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बीच कथित कहासुनी के मुद्दे की जांच कर सकते हैं।

सूत्रों ने कहा कि नायडू ने कुछ विपक्षी सदस्यों से कहा कि इस तरह की घटनाओं पर अध्यक्ष द्वारा संज्ञान लेने की कोई मिसाल नहीं है, लेकिन अगर कोई लिखित शिकायत मिलती है तो वह इसकी जांच कर सकते हैं।

सेन को सदन में उनके अनियंत्रित व्यवहार के लिए शेष सत्र के लिए सदन से निलंबित कर दिया गया क्योंकि उन्होंने गुरुवार को कथित रूप से आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के बयान की प्रति को छीन कर फाड़ दिया था।

बाद में उन्होंने आरोप लगाया कि हंगामे के बीच सदन को स्थगित करने के बाद पुरी ने उन्हें धमकी दी और मौखिक रूप से बुरा-भला कहा।

हालांकि यह देखते हुए कि यह घटना (पुरी के साथ) व्यक्तिगत कहासुनी और आरोपों से संबंधित है नायडू ने कहा कि यदि इस मामले को प्रासंगिक विवरण के साथ उचित रूप में उनके ध्यान में लाया जाता है, तो वह पूर्व महासचिवों से परामर्श करने के बाद भविष्य के मार्गदर्शन के लिए इसकी जांच कर सकते हैं, क्योंकि यह एक मिसाल कायम करेगा।

आनंद शर्मा, जयराम रमेश, सुखेंदु शेखर राय, तिरुचि शिवा और वाइको सहित कुछ विपक्षी नेताओं ने सेन के निलंबन के बाद सभापति से मुलाकात की।

सेन के निलंबन के प्रस्ताव को कामकाज में सूचीबद्ध न किए जाने के मुद्दे पर नायडू ने कहा कि सभापति को यह अधिकार है कि वह दिन की कार्य सूची में शामिल किए बिना सदन में किसी भी कार्य की अनुमति दे सकते हैं। जैसा कि वर्षों से होता आ रहा है।

राज्यों की परिषद में प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियमों के नियम 29 (2) के अनुसार इसकी अनुमति दी गई है।

यह नियम राज्य सभा के सभापति को उस दिन के लिए सूचीबद्ध किए बिना किसी भी कार्य को सदन में करने की अनुमति देने का अधिकार देता है।

माना जाता है कि वैष्णव के बयान को फाड़ने के बाद सेन को खेद व्यक्त करने का कोई अवसर नहीं मिलने पर, नायडू ने विपक्षी नेताओं से कहा कि खेद व्यक्त करने के लिए संबंधित सदस्य को सुझाव देना अध्यक्ष का काम नहीं है।

उन्होंने कहा कि वाइको ने सदन के कुछ वर्गों को शून्यकाल और विशेष उल्लेखों के माध्यम से सार्वजनिक महत्व के मुद्दों को उठाने के अवसरों से वंचित किए जाने पर भी चिंता व्यक्त की।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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