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आंबागढ़ किला प्रकरण में सांसद मीणा ने ज्ञापन सौंपा, आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी

By भाषा | Updated: July 29, 2021 21:54 IST

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जयपुर, 29 जुलाई राजधानी जयपुर के पास​ स्थित मध्यकालीन किले आंबागढ़ को लेकर जारी विवाद में बृहस्पतिवार को सांसद किरोड़ीलाल मीणा भी शामिल हो गए। मीणा ने यहां प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और आदिवासी मीणा समाज की ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने की मांग की।

उल्लेखनीय है कि यह किला दो समुदायों के बीच विवाद का केन्द्र बनता जा रहा है। इस किले पर लगे भगवा ध्वज को हाल ही में निर्दलीय विधायक रामकेश मीणा की उपस्थिति में कुछ लोगों ने कथित तौर पर फाड़ दिया था। इस संबंध में ट्रांसपोर्ट नगर थाने में मीणा समुदाय और दक्षिणपंथी संगठनों की ओर से 22 जुलाई को दो प्राथमिकी दर्ज करवाई गईं। पुलिस को बुधवार को कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिये किले और उस पर बने मंदिर में प्रवेश को रोकना पड़ा।

भाजपा सांसद मीणा ने बृहस्पतिवार को यहां सचिवालय में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने आदिवासी मीणा समाज की ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने और धार्मिक भावनाओं को भड़काने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

मीणा ने संवाददाताओं से कहा, '' हमने सरकार से किले को खोलने ओर चाबियां मीणा समुदाय को सौंपने की मांग की है ताकि मंदिर में वो लोग पूजा कर सकें। इससे पहले पट्टिका हटाई गई, मूर्तियों की चोरी की गई और अब प्रवेश बंद कर दिया गया।''

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायक रामकेश मीणा अपने स्वार्थ के लिये वैमनस्य पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

वहीं, रामकेश मीणा ने संवाददाताओं को बताया कि आंबागढ़ किला मीणा समुदाय का ऐतिहासक धरोहर है और कुछ असामाजिक तत्वों ने मीणा समाज के इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने का प्रयास किया है जो स्थानीय लोगों को मंजूर नहीं है, जिसके कारण घटना घटित हुई।

विधायक के समर्थक समूह ने दावा किया कि किला मीणा समुदाय के कुलदेवता का है। पहले मंदिर में अल्पसंख्यक समुदाय के एक समूह द्वारा मूर्तियों को तोड़ा गया और बाद में कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने समुदाय की धार्मिक संहिता को चोट पहुंचाने के लिए किले के ऊपर भगवा झंडा फहरा दिया।

वहीं, दूसरी ओर सर्व ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष सुरेश मिश्र ने बृहस्पतिवार को एक संवाददाता सम्मेलन में लोगों से सांप्रदायिक सौहार्द बनाये रखने और किले के अंदर स्थित मंदिर को पूजा-अर्चना के लिये खोलने की अपील की।

मिश्रा ने कहा, ‘‘ जहां तक मंदिर के टाइटल का सवाल है तो तत्कालीन शाही परिवार ने मंदिर को एक परिवार को सौंप दिया था जो वर्षों से मंदिर की देखभाल कर रहा है। कोई भी यह नहीं कह सकता कि मंदिर उनका है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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