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एमपी चुनावः मतदान के ऐन पहले बीजेपी में आया बड़ा संकट, संघ-भाजपा चिंतित

By राजेंद्र पाराशर | Updated: November 22, 2018 05:40 IST

मध्य प्रदेश चुनावः विधानसभा चुनाव के लिए जैसे-जैसे मतदान की तारीख समीप आ रही है और प्रचार गर्माता जा रहा है, राज्य में करीब एक दर्जन से ज्यादा भाजपा प्रत्याशियों के सामने भितरघात का संकट भी बढ़ रहा है. 

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए बागियों के बाद अब भीतरघाती संकट बनते जा रहे हैं. जिन्हें भाजपा ने बागी बनने से रोका था वे मान तो गए, मगर अब भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करने के बजाय घर बैठ गए हैं. जो मैदान में दिख भी रहे हैं, तो केवल औपचारिकता करते नजर आ रहे हैं. भितरघात को लेकर अब प्रत्याशी भी संगठन स्तर पर शिकायतें करने लगे हैं, जिनको लेकर संगठन चिंतित हो गया है.

विधानसभा चुनाव के लिए जैसे-जैसे मतदान की तारीख समीप आ रही है और प्रचार गर्माता जा रहा है, राज्य में करीब एक दर्जन से ज्यादा भाजपा प्रत्याशियों के सामने भितरघात का संकट भी बढ़ रहा है. भितरघात की स्थिति वहां निर्मित हो रही है, जहां पर भाजपा के घोषित प्रत्याशी का विरोध हुआ था, उस वक्त तो भाजपा ने जैसे-तैसे विरोध करने वालों को मना लिया, मगर बागी होने वालों को नहीं रोक पाए. अब बागियों से ज्यादा भाजपा को भितरघात का संकट सताने लगा है.

भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के कहने पर भाजपा के नेता मैदान से तो हट गए, मगर वे शांत होकर अपने घरों में बैठ गए हैं. नेताओं के शांत बैठने से उनके समर्थक भी मैदान में नजर नहीं आ रहे हैं. नेताओं की समर्थकों के मैदान में न आने से भाजपा के घोषित प्रत्याशी के सामने प्रचार के अलावा मतदाता के बीच अपनी पैठ जमाने में परेशानी आ रही है. नाराज नेता और उनके समर्थकों द्वारा भितरघात बातें सामने आने लगी है.

कुछ स्थानों से प्रत्याशियों ने इस तरह की शिकायतें भी भाजपा संगठन को की है. भाजपा को भोपाल हुजूर के अलावा बुरहानपुर, होशंगाबाद, शमशाबाद, हरदा, सुसनेर, मुलताई, सागर, पन्ना, रीवा, टीकमगढ़, जबलपुर पश्चिम, जबलपुर उत्तर, बड़वारा, ग्वालियर दक्षिण, ग्वालियर पूर्व, बड़वारा, सिवनी, मांधाता (खण्डवा), पंधाना के अलावा भिंड से भितरघात होने की आशंका जताते हुए शिकायतें भी मिली है.

राघवजी माने, मगर घर बैठे

पूर्व वित्त मंत्री राघवजी ने शमशाबाद से निर्वाचन फार्म भरा और बाद में संगठन के कहने पर वे नामांकन वापस लेने को मजबूर हुए, मगर इसके बाद उनकी सक्रियता न तो शमशाबाद में और न ही विदिशा विधानसभा क्षेत्र में दिखाई दे रही है. वे मौन हैं. राघवजी के समर्थक भी मौन हैं जिसके चलते भाजपा के प्रत्याशी चिंतित हैं.

इसी तरह मालवा के मनासा विधानसभा क्षेत्र से विधायक कैलाश चावला का टिकट भाजपा ने काटा इसके बाद से वे अपने क्षेत्र से कट गए हैं. वे घर बैठ गए हैं. हालांकि संघ के निर्देश पर वे मेल-जोल तो कर रहे हैं, मगर खुलकर कहीं भी वे प्रत्याशी के पक्ष में नजर नहीं आ रहे हैं. चावला के अलावा पूर्व मंत्री और पन्ना से विधायक कुसुम महदेले भी अपना टिकट कटने से नाराज हैं.

इसके चलते वे अपने समर्थकों के साथ मैदान से दूरी बनाए हुए हैं. यहां पर भाजपा प्रत्याशी परेशान हो रहे हैं. कुसुम महदेले अपनी नाराजगी केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और उमा भारती के खिलाफ ट्वीटर पर निकाल भी चुकी हैं.

नंदकुमार सिंह, लोकेन्द्र सिंह भी सक्रिय नहीं

खंडवा के सांसद और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान भी अपने संसदीय क्षेत्र से कटे नजर आ रहे हैं. वे अब तक केवल पंधाना और बुरहानपुर संसदीय क्षेत्र में नजर आए, वह भी औपचारिकता के तौर पर.

मंगलवार को केन्द्रीय मंत्री राजनाथसिंह की सभा के दौरान वे मंच पर दिखाई दिए, मगर मैदान में वे नहीं है. इसके चलते वर्षों से चल रही बुरहानपुर की विधायक और मंत्री अर्चना चिटनिस चिंतित हैं. वहीं मांधता विधानसभा क्षेत्र से विधायक लोकेन्द्र सिंह भी टिकट कटने के बाद से घर में कैद हो गए हैं.

वे भी मैदान में नहीं है, जिसके चलते भाजपा का चिंंता बढ़ने लगी है. इसी तरह चुनाव के वक्त भाजपा में आए निर्दलीय विधायक दिनेश राय मुनमुन का विरोध कर रहे नेता नीता पटेरिया, ढालसिंह बिसेन वरिष्ठ नेताओं कहने पर टिकट वितरण के बाद शांत हो गए थे, मगर उनकी सक्रियता भी मैदान में कम ही नजर आ रही है.

सुषमा समर्थकों में भी बैचेनी

विदेश मंत्री और विदिशा की सांसद सुषमा स्वराज ने लंबे समय से अपने संसदीय क्षेत्र से नाता तोड़ रखा है. इसके चलते अब उनके समर्थक बैचेन नजर आ रहे हैं. सूत्रों की माने तो सुषमा ने टिकट वितरण के समय ही अपने समर्थकों से कह दिया था कि वे अपने स्तर पर प्रयास करें. एक तरह से सुषमा ने अपने समर्थकों को आजाद कर दिया था. सुषमा समर्थक जीतेन्द्र डागा भोपाल की हुजूर विधानसभा से टिकट के दावेदार थे, मगर उन्हें टिकट नहीं मिला.

इसके बाद वे निर्दलीय के रुप में नामांकन भर चुके थे, मगर केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कहने पर मान गए थे और नामांकन वापस ले लिया था. मगर वे भी भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में निष्क्रिय हैं. अपने समर्थकों के साथ डागा की सक्रियता नजर नहीं आ रही है. इसके अलावा सुषमा समर्थक मंडीदीप की पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष पूर्णिमा जैन ने भाजपा को छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है.

वे अपने समर्थकों के साथ अब भोजपुर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश पचौरी के पक्ष में प्रचार कर रही हैं. पूर्णिमा जैन के अलावा कद्दावर भाजपा नेत्री और सुषमा समर्थक औबेदुल्लागंज की नगर पंचायत अध्यक्ष हरप्रीत कौर भी मौन हैं. वे भी भाजपा प्रत्याशी सुरेन्द्र पटवा के चुनाव प्रचार से दूरी बनाए हुए है

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