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मप्रः विधानसभा चुनाव की गलतियों को सुधारने में जुटी भाजपा, ये है नया प्लान

By राजेंद्र पाराशर | Updated: January 26, 2019 04:44 IST

लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने अपने-अपने तय लक्ष्य को पाने के लिए संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को संगठित करने का काम तेज कर दिया है.

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मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव की तैयारियों में भाजपा और कांग्रेस जुट गई है. दोनों ही दलों ने संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को महत्व देने के लिए काम तेज कर दिया  है. कांग्रेस ने लोकसभा क्षेत्र प्रभारियों को निर्देशित किया है कि वे प्रत्याशी चयन में दखल न करें, केवल संगठन को मजबूत करें. वहीं भाजपा सर्वे के आधार पर प्रत्याशी की तलाश कर रही है. साथ ही विधानसभा चुनाव के दौरान जो गलतियां प्रत्याशी चयन में हुई उसमें सुधार करने का काम भी कर रही है.

लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने अपने-अपने तय लक्ष्य को पाने के लिए संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को संगठित करने का काम तेज कर दिया है. कांग्रेस ने सभी 29 लोकसभा क्षेत्र के प्रभारियों द्वारा जब प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में हिस्सा लेना शुरु किया और विवाद गहराया तो लोकसभा प्रभारियों को साफ कह दिया कि वे अपने लोकसभा क्षेत्र में संगठन को मजबूत करने का काम करें.  कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी बांटे, बूथ मैनेजमेंट बेहतर करें और उस क्षेत्र के जहां के वे प्रभारी है वहां के प्रभावशाली लोगों की सूची बनाकर प्रदेश संगठन को दें. कांग्रेस ने लोकसभा प्रभारियों को प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया से विवाद के चलते दूर रहने को कहा है.

वहीं भाजपा ने भी प्रत्याशी चयन प्रक्रिया के लिए सर्वे को प्रमुखता दी है. भाजपा संगठन सर्वे के आधार पर सभी 29 लोकसभा क्षेत्रों के प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा. भाजपा ने इस बात पर जोर देना शुरु कर दिया है कि विधानसभा चुनाव के दौरान जो प्रत्याशी चयन प्रक्रिया के दौरान गलतियां हुई उनसे बचा जाए. भाजपा इन गलतियों को अब दोहराना नहीं चाह रही है. भाजपा पदाधिकारियों का कहना है कि इस बार चयन प्रक्रिया में जातिगत समीकरण का तो ध्यान रखा जाएगा साथ ही एंटी इंकम्बेंसी वाले दावेदारों से पार्टी दूरी बनाएगी. यही वजह है कि सर्वे में इन सभी बातों को महत्व दिया जा रहा है.

संघ की बात को ध्यान देगा संगठन

विधानसभा चुनाव में हार का एक कारण यह भी रहा कि संघ द्वारा बार-बार संगठन को हार का कारण बनने वाले कमजोरियों को दूर करें, मगर संगठन ने उन पर ध्यान नहीं दिया. इस बार संगठन ने तय किया है कि संभागीय संगठन मंत्रियों को सक्रिय किया जाए. हाल ही में प्रदेश संगठन महामंत्री और प्रदेश के चुनाव प्रभारियों, सह प्रभारियों ने संगठन मंत्रियों से भी इस संबंध में चर्चा की है.

टॅग्स :लोकसभा चुनावभारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)कांग्रेस
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