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द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए हॉकी कोच सांगवान से ज्यादा मेधावी लोग मिले, केंद्र ने अदालत को बताया

By भाषा | Updated: November 12, 2021 16:15 IST

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नयी दिल्ली, 12 नवंबर केंद्र ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में कहा कि 2021 के द्रोणाचार्य पुरस्कार (नियमित श्रेणी) के लिए हॉकी कोच संदीप सांगवान के नाम पर विचार नहीं किया गया क्योंकि उनसे अधिक मेधावी व्यक्ति पुरस्कार के पात्र पाए गए।

केंद्र की दलीलों पर गौर करते हुए उच्च न्यायालय ने सांगवान की उस याचिका पर सरकार से जवाब मांगा जिसमें उन्होंने युवा मामले और खेल मंत्रालय के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें द्रोणाचार्य पुरस्कार (नियमित श्रेणी) से बाहर रखा गया था।

न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की एकल पीठ ने नोटिस जारी कर केंद्र से याचिका पर जवाब मांगा और मामले को आगे की सुनवाई के लिए 23 दिसंबर को सूचीबद्ध कर दिया।

मामले में निर्देश लेने के अदालत के पहले के आदेश के अनुसरण में, केंद्र सरकार के स्थायी वकील अनिल सोनी ने कहा कि याचिकाकर्ता की तुलना में अधिक लाभप्रद स्थिति में मौजूद ज्यादा मेधावी व्यक्ति पाए गए।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय लिया गया है कि यह एक ओलंपिक और पैरालिंपिक वर्ष है, और इन आयोजनों में एथलीटों के उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए, मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार और अर्जुन पुरस्कार में वृद्धि के लिए चयन समिति की सिफारिशें स्वीकार्य हैं।

उन्होंने कहा, “हालांकि, अन्य श्रेणियों में योजना में उल्लिखित संख्या से अधिक पुरस्कारों की संख्या बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है और निश्चित रूप से 2020 में दिए गए पुरस्कार से अधिक नहीं। इसी के मुताबिक, द्रोणाचार्य (आजीवन श्रेणी), द्रोणाचार्य (नियमित श्रेणी) और ‘ध्यानचंद लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ में से प्रत्येक में केवल पांच नाम को पुरस्कारों के लिए अंतिम रूप दिया गया था।”

अदालत इस स्तर पर एक सीलबंद लिफाफे में रिकॉर्ड मंगाने के लिए सहमत नहीं थी और उसने अधिकारियों से कहा कि जरूरत पड़ने पर दस्तावेजों को उसके अवलोकन के लिए तैयार रखें।

एक प्रसिद्ध हॉकी कोच होने का दावा करने वाले सांगवान ने कहा कि खेल पुरस्कार 2021 के लिए चयन समिति द्वारा मेधावी पाए जाने के बावजूद केंद्र ने द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए नामों पर विचार करते समय उनकी अनदेखी की ।

सांगवान का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा ने दलील दी कि मंत्रालय के खेल और खेलों में उत्कृष्ट कोचों के लिए द्रोणाचार्य पुरस्कार की योजना के संदर्भ में हॉकी के लिए सर्वोच्च अंक हासिल करने वाले सबसे प्रबल दावेदार होने के बावजूद उनकी उपेक्षा की गई।

याचिका में कहा गया है कि सांगवान ने 15 साल से ज्यादा समय तक कोच रहने के अलावा कई अवसरों पर राष्ट्रीय पुरुष हाकी टीम के प्रबंधक के रूप में भी काम किया है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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