दुलारचंद यादव हत्याकांडः जेल से बाहर आएंगे जदयू बाहुबली विधायक अनंत सिंह?, पटना हाईकोर्ट ने दी जमानत
By एस पी सिन्हा | Updated: March 19, 2026 14:38 IST2026-03-19T14:37:19+5:302026-03-19T14:38:05+5:30
mokama police Dularchand Yadav murder case:

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पटनाः दुलारचंद यादव हत्याकांड में बेऊर जेल में बंद मोकामा से जदयू के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद अब उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, जेल से बाहर आने के लिए उन्हें अदालत द्वारा निर्धारित सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। जमानत मिलने के बाद जैसे ही कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी तब अनंत सिंह जेल से बाहर आ सकेंगे। इस फैसले के बाद मोकामा और आसपास के राजनीतिक माहौल में हलचल तेज हो गई है। उल्लेखनीय है कि दुलारचंद यादव हत्याकांड को लेकर यह मामला काफी चर्चा में रहा है।
बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान दुलारचंद की हत्या हुई थी जिसके बाद अनंत सिंह का नाम उसमे आया था। उन्हें चुनाव के बीच में ही गिरफ्तार कर लिया गया था। संभावना जताई जा रही है कि हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अब कागजी प्रक्रिया पूरी की जाएगी और शुक्रवार या फिर शनिवार तक जेल से बाहर आ सकते हैं। दुलारचंद हत्याकांड को लेकर अनंत सिंह बेऊर जेल में बंद थे।
लेकिन अब उन्हें जमानत मिल गई है, जिसके बाद उनके समर्थकों के बीच खुशी है। अनंत सिंह की गिरफ्तारी दुलारचंद हत्याकांड मामले में नवंबर 2025 में हुई थी। अब लगभग चार महीने के बाद वह जेल से बाहर आने वाले हैं। इससे पहले अनंत सिंह राज्यसभा चुनाव को लेकर वोट डालने के लिए 16 मार्च को जेल से बाहर आए थे। लेकिन वोट करने के बाद वे वापस बेऊर जेल चले गए थे।
बता दें कि मोकामा के बाहुबली नेता अनंत सिंह का सियासी सफर बिहार की राजनीति में काफी चर्चित रहा है। उन्होंने पहली बार 2005 में मोकामा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर राजनीति में मजबूत एंट्री की। इसके बाद 2010 और 2015 में भी उन्होंने लगातार जीत हासिल की और क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी।
शुरुआत में वे जदयू से जुड़े रहे और पार्टी के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे। हालांकि बाद में पार्टी से मतभेद के चलते उन्होंने अलग राह पकड़ी और 2015 में निर्दलीय चुनाव लड़कर भी जीत दर्ज की। अनंत सिंह की छवि एक दबंग नेता की रही है, जो अपने क्षेत्र में मजबूत जनाधार रखते हैं।
उनके राजनीतिक करियर में कई विवाद और कानूनी मामले भी जुड़े रहे, लेकिन इसके बावजूद मोकामा में उनका प्रभाव कायम रहा। आज भी वे बिहार की सियासत में एक अहम और चर्चित चेहरा बने हुए हैं। उन्होंने 2020 के चुनाव में राजद के टिकट से जीत हासिल की।
हालांकि बाद में एके 47 जब्ती मामले में उनकी विधानसभा सदस्यता चली गई तो 2022 के उपचुनाव में उनकी पत्नी नीलम देवी ने मोकामा से राजद के टिकट पर जीत हासिल की। वहीं 2025 के विधानसभा चुनाव में फिर से अनंत सिंह की जदयू में वापसी हुई और वे मोकामा से चुनाव जीतने में सफल रहे। हालांकि चुनाव प्रचार के बीच में ही उनकी दुलारचंद यादव हत्याकांड में नाम आने के कारण गिरफ्तारी हुई। तब से वे जेल में थे। लेकिन अब उन्हें हाईकोर्ट से जमानत मिली है।