बिहार विधानसभा में विधायक ने उठाया EWS के अभ्यर्थियों के लिए उम्र सीमा में छूट देने की मांग
By एस पी सिन्हा | Updated: February 23, 2026 15:16 IST2026-02-23T15:16:36+5:302026-02-23T15:16:36+5:30
मामले की गंभीरता को देखते हुए संसदीय कार्य विभाग के मंत्री विजय चौधरी ने सरकार का पक्ष रखा और कानूनी अड़चनों की परतें खोलीं।

बिहार विधानसभा में विधायक ने उठाया EWS के अभ्यर्थियों के लिए उम्र सीमा में छूट देने की मांग
पटना: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सोमवार को प्रश्नकाल के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के छात्र-छात्राओं को उम्र सीमा में छूट देने का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। सत्ता पक्ष के ही विधायक देवेश कांत सिंह ने राज्य के ईडब्ल्यूएस के अभ्यर्थियों के लिए उम्र सीमा में छूट की मांग उठाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए संसदीय कार्य विभाग के मंत्री विजय चौधरी ने सरकार का पक्ष रखा और कानूनी अड़चनों की परतें खोलीं।
दरअसल, प्रश्नकाल में विधायक देवेश कांत सिंह ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के कई छात्र आर्थिक तंगी, संसाधनों की कमी और सामाजिक दबावों के कारण समय पर तैयारी नहीं कर पाते। ऐसे में वे उम्र सीमा पार कर जाते हैं और नौकरी के अवसर खो देते हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या राज्य इस वर्ग को राहत देने पर विचार कर रहा है? देवेश कांत सिंह ने गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि अन्य जगहों पर इस मुद्दे पर विमर्श हो सकता है, तो बिहार में भी इस दिशा में पहल होनी चाहिए।
उन्होंने तर्क दिया कि जब अन्य वर्गों को आरक्षण और आयु सीमा में छूट का लाभ मिलता है तो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए भी विशेष प्रावधान होना चाहिए। मंत्री विजय चौधरी ने जवाब में कहा कि ईडब्ल्यूएस से जुड़ा मूल प्रावधान केंद्र सरकार के अधिनियम के तहत लागू है। इस अधिनियम में आयु सीमा में छूट का कोई प्रावधान नहीं है और इसमें बदलाव करने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य केवल केंद्र के कानून के अनुरूप नियम लागू कर सकता है। मंत्री ने यह भी कहा कि सदस्य द्वारा उठाए गए मुद्दे पर सरकार अध्ययन कर सकती है। यदि भविष्य में केंद्र सरकार इस विषय में कोई संशोधन या दिशा-निर्देश जारी करती है, तो राज्य सरकार उस पर विचार कर सकती है।
विजय चौधरी ने यह भी कहा कि अगर अन्य राज्यों द्वारा इस तरह की छूट दी गई है, तो सरकार उन तथ्यों और संभावनाओं का अध्ययन करा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में केंद्र सरकार इस अधिनियम में कोई संशोधन करती है, तो बिहार सरकार उसे सहर्ष लागू करने पर विचार करेगी।