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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कोविड से अनाथ बच्चों की सुरक्षा समेत कई पहल की

By भाषा | Updated: December 25, 2021 16:44 IST

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(उज्मी अतहर)

नयी दिल्ली, 25 दिसंबर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 2021 में कोविड-19 महामारी के दौरान बढ़ते कुपोषण से निपटने और अपने माता-पिता में से किसी एक को खोने वाले एक लाख से अधिक बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास सुनिश्चित करने, महिलाओं की विवाह योग्य उम्र बढ़ाकर 21 करने के लिए विधेयक पेश करने जैसे कई उपाय किए।

बच्चे कोविड-19 से कम प्रभावित हुए, लेकिन उनमें से लगभग 1.32 लाख ने अपने माता-पिता में से किसी एक को खो दिया। इससे ऐसे बच्चों के शोषण और तस्करी का खतरा बढ़ गया, जो मंत्रालय के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय साबित हुआ।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने कहा कि अप्रैल 2020 से इस साल सात दिसंबर तक 9,800 से अधिक बच्चे अनाथ हो गए, 508 बेसहारा छोड़ दिए गए और 1.32 लाख ने अपने माता-पिता में किसी को खो दिया। इसका संज्ञान लेते हुए सरकार ने इस साल की शुरुआत में बच्चों के लिए ‘पीएम-केयर्स’ योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत उन बच्चों को सहायता प्रदान की जाती है जो महामारी के दौरान अनाथ हो गए थे।

एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कहा कि 2021 में उन्होंने बच्चों पर कोविड-19 के सामाजिक प्रभाव को लेकर काम किया। कानूनगो ने कहा, ‘‘हमने कोशिश की कि 2021 के दौरान बेसहारा हुए बच्चे कहीं खो न जाएं और किशोर न्याय कानून के प्रावधानों के तहत उनकी देखभाल सुनिश्चित की जा सके।’’ उन्होंने कहा कि अगले साल सबसे बड़ी चुनौती सड़क पर रहने वाले बच्चों की समस्या का समाधान करना होगा।

इस वर्ष पेश किए गए दो प्रमुख विधेयक किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2021 और बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक, 2021 थे। बाल विवाह से निपटने के लिए, सरकार ने बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक, 2021 पेश किया, जिसके तहत महिलाओं की विवाह योग्य आयु 18 से बढ़ाकर 21 कर दी गई। इस विधेयक को लेकर विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया आई। महिलाओं और पुरुषों के लिए विवाह की समान आयु 21 वर्ष तय करने के प्रावधान वाले विधेयक को लोकसभा में पेश किया गया। विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजा गया है।

केंद्र सरकार ने हिंदू दत्तक और भरण-पोषण कानून (एचएएमए) के तहत अंतर-देशीय दत्तक ग्रहण को आसान बनाने के लिए नियम भी तय किए।

इस वर्ष महामारी के कारण महिलाओं और बच्चों में बढ़ते कुपोषण से निपटना भी एक अन्य प्रमुख चिंता थी। पोषण संबंधी परिणाम की सतत निगरानी के लिए ‘पोषण ट्रैकर’ को विभिन्न राज्यों में लागू किया गया। आंगनबाड़ियों को ऐप में बच्चों और स्तनपान कराने वाली तथा गर्भवती महिलाओं के पोषण डेटा दर्ज करने के लिए इसका इस्तेमाल करने को लेकर प्रशिक्षित किया गया।

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि 2021 दुनिया भर में महिलाओं के लिए उपलब्धियों का भी वर्ष रहा। ओलंपिक में महिलाओं ने विशिष्ट प्रदर्शन किया वहीं भारतीय मूल की महिलाओं ने विश्व स्तर पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराया। उन्होंने कहा कि एनसीडब्ल्यू ने उद्यमिता, डिजिटल साक्षरता, कानूनी जागरूकता सहित महिलाओं से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों में परियोजनाएं शुरू की हैं।

अगले साल क्या उम्मीद की जाए, इस पर शर्मा ने कहा कि प्रमुख चिंताओं में से एक लोगों की मानसिकता को बदलना होगा क्योंकि ‘‘हम देख सकते हैं, नीतियों और कानूनों में कई बदलावों और सरकार द्वारा शुरू की गई कई नयी पहल के बावजूद लोगों की मानसिकता महिलाओं के विकास और प्रगति में एक प्रमुख बाधा बनी हुई है। यह महत्वपूर्ण है कि हम घरों में लैंगिक समानता सुनिश्चित करें ताकि यह समाज में परिलक्षित हो।’’

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इस साल अपने सभी प्रमुख कार्यक्रमों को बेहतर क्रियान्वयन के लिए तीन प्रमुख योजनाओं के तहत वर्गीकृत किया। इसमें मिशन पोषण 2.0 (पोषण सामग्री, वितरण, संपर्क और परिणाम को मजबूत करना), मिशन वात्सल्य (बाल संरक्षण सेवाएं और बाल कल्याण सेवाएं) और मिशन शक्ति (महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए नीतियां और योजनाएं) शामिल हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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