Maharashtra: तिरंगे में लिपटकर लौटा नागपुर का बेटा, नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
By फहीम ख़ान | Updated: March 7, 2026 21:25 IST2026-03-07T21:25:55+5:302026-03-07T21:25:55+5:30
असम के कार्बी आंगलोंग जिले में भारतीय वायुसेना का सुखोई-30 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इस हादसे में स्क्वाड्रन लीडर अनुज और नागपुर के सपूत फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर शहीद हो गए.

Maharashtra: तिरंगे में लिपटकर लौटा नागपुर का बेटा, नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
नागपुर:नागपुर के न्यू सुभेदार लेआउट निवासी भारतीय वायुसेना के शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर को शनिवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. तिरंगे में लिपटे बेटे को देखकर परिवार ही नहीं, पूरा इलाका गम में डूब गया. हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और ‘भारत माता की जय’ तथा ‘शहीद पूर्वेश अमर रहें’ के नारों से वातावरण गूंज उठा. एक युवा पायलट, एक बेटे और एक सपने देखने वाले इंसान की यह कहानी अब देशभक्ति और बलिदान की मिसाल बन गई है. नागपुर का यह वीर सपूत भले ही इस दुनिया से चला गया हो, लेकिन उसकी बहादुरी और देश के प्रति समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा.
असम के कार्बी आंगलोंग जिले में भारतीय वायुसेना का सुखोई-30 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इस हादसे में स्क्वाड्रन लीडर अनुज और नागपुर के सपूत फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर शहीद हो गए. शुक्रवार को जैसे ही यह दु:खद खबर नागपुर में रहने वाले दुरगकर परिवार को मिली, घर में मातम छा गया. शुक्रवार की शाम ही भारतीय वायुसेना की टीम शहीद का पार्थिव लेकर पहुंचने वाली थी. लेकिन देर रात तक पार्थिव नहीं पहुंच सका.
इसी बीच शनिवार दोपहर 1.30 बजे के दौरान भारतीय वायुसेना की टीम शहीद पूर्वेश का पार्थिव शरीर लेकर नागपुर पहुंची. दोपहर 3 बजे के करीब पार्थिव शरीर न्यू सुभेदार लेआउट स्थित उनके घर पहुंचते ही पूरा क्षेत्र शोक में डूब गया. हजारों लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे. तिरंगे में लिपटे शहीद को देखकर हर आंख नम हो गई. वायुसेना के अधिकारियों ने इस समय शहीद के पिता रवींद्र, मां संध्या और बहन सायली को पूर्वेश से जुड़ी सामग्री और शहीद की फोटो सौंपी. अपने बेटे और भाई से जुड़ी यादों को हाथ में लेते ही तीनों फफककर रो पड़े.
पूर्वेश की मां संध्या और पिता रवींद्र दुरगकर की आंखों में आंसू थे. बेटे के जाने का दु:ख साफ दिखाई दे रहा था, लेकिन साथ ही इस बात का गर्व भी था कि उनका बेटा देश के लिए शहीद हुआ. मित्रों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों का भी रो-रोकर बुरा हाल था. अंतिम संस्कार से पहले भारतीय वायुसेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर शहीद को श्रद्धांजलि दी. जवानों की अनुशासित सलामी और बंदूकों की गूंज ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया.
इसके बाद फूलों से सजे वाहन में पार्थिव शरीर को मानेवाड़ा घाट ले जाया गया, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. इस दौरान जिलाधिकारी डॉ. विपिन इटनकर मानेवाड़ा घाट पहुंचे और शहीद परिवार से मुलाकात कर उन्हें ढाढस बंधाया. नागपुर की महापौर नीता ठाकरे, पूर्व महापौर दयाशंकर तिवारी और विधायक मोहन मते सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भी शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की.
बहन सायली अमेरिका से पहुंची
बताया जाता है कि करीब दस दिन पहले ही पूर्वेश नागपुर आए थे. उनकी बहन सायली (बकुली) आईआईटी से पढ़ाई के बाद अमेरिका में रह रही हैं. भाई के शहीद होने की खबर मिलते ही वह तुरंत नागपुर के लिए रवाना हुईं. शनिवार को जब वह घर पहुंचीं और भाई का पार्थिव शरीर देखा, तो अपने आंसू नहीं रोक सकीं और फूट-फूटकर रो पड़ीं.