मुंबई, 30 मार्च महाविकास आघाडी सरकार में शामिल पार्टियों ने महाराष्ट्र में फिर से लॉकडाउन लगाये जाने की जरूरत पर मंगलवार को अलग-अलग विचार प्रकट किये। राकांपा और शिवसेना के कुछ नेताओं ने कोविड-19 महामारी के खिलाफ इस तरह की रणनीति की कारगरता पर सवाल उठाए।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता एवं महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि लॉकडाउन लागू करना राज्य सरकार के लिए आखिरी विकल्प है।
गौरतलब है कि कोविड-19 के नये मामले तेजी से बढ़ने के मद्देनजर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने रविवार को अधिकारियों से लॉकडाउन लागू करने के लिए एक ऐसी योजना तैयार करने को कहा था, जिसका अर्थव्यवस्था पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। राज्य कोविड-19 कार्य बल के सुझाव पर यह कदम उठाया गया।
महाराष्ट्र में कोविड-19 के नये मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। राज्य में सोमवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 31,643 नए मामले सामने आए थे।
टोपे ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘कोई भी व्यक्ति लॉकडाउन नहीं चाहता है, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी नहीं। हालांकि, यह हमारे समक्ष अंतिम विकल्प है। लॉकडाउन पर विचार करने में कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन यह काफी समस्याएं पैदा करेगा। ’’
वहीं, टोपे के मंत्रिमंडल सहकर्मी एवं राकांपा नेता नवाब मलिक ने वायरस के प्रसार की रोकथाम में लॉकडाउन की कारगरता पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा, ‘‘लॉकडाउन लागू करने से लोगों पर प्रतिकूल रूप से प्रभाव पड़ेगा। हम नहीं चाहते हैं कि लोगों को समस्याएं हों।’’
राज्य के मंत्री एवं शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने कहा कि लॉकडाउन जैसे उपाय से किसी की भी मदद नहीं होगी। उन्होंने कहा, ‘‘हमने महसूस किया है कि मास्क पहनना और स्वच्छता रखना ही वायरस को फैलने से रोकने का एकमात्र तरीका है। ’’
इस बीच, किसी तरह के भी लॉकडाउन के भाजपा के विरोध को दोहराते हुए पार्टी के प्रदेश प्रमुख चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि राज्य सरकार को पहले फेरीवालों और श्रमिकों के लिए वित्तीय प्रावधान करना चाहिए, जो फिर से लॉकडाउन लगाये जाने पर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।
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