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मध्य प्रदेशः विधानसभा में उठा अतिथि विद्वानों का मुद्दा, भाजपा ने किया वॉक आउट

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: January 18, 2020 06:18 IST

राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने अतिथि विद्वानों का मुद्दा उठाया.

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ठळक मुद्देनेता प्रतिपक्ष ने कांग्रेस पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया. विपक्ष का आरोप था कि 15 साल से अध्यापन का कार्य कर रहे अतिथि विद्वानों को बाहर किया जा रहा है.

मध्यप्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को राज्य विधानसभा में भाजपा ने राजधानी में नियमितीकरण की मांग को लेकर धरने पर बैठे अतिथि विद्वानों का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया. बाद में सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन किया.

राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने अतिथि विद्वानों का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में जो वादे अतिथि शिक्षक, अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण को लेकर किया था उसने उसका पालन अब तक नहीं किया, बल्कि इस मामले की जांच समिति का गठन कर दिया, जिसकी कोई चर्चा पहले से नहीं थी. उन्होंने कांग्रेस पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया. 

उन्होंने कहा कि प्रदेश में 8 हजार सहायक प्राध्यापकों के पद खाली हैं. ऐसे में जो अतिथि विद्वान पिछले 1 वर्ष से आंदोलन कर रहे हैं उन सभी को सरकार द्वारा समायोजित किया जाना चाहिए था ना की वहां जांच बैठाने का कार्य करती. हम इस सदन के माध्यम से ये मांग रखते हैं की सभी अतिथि विद्वानों को नियमित किया जाए.

उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने जानकारी दी कि राजधानी में लंबे समय से आंदोलनरत अतिथि विद्वानों के लिए च्वाइस फिलिंग की प्रक्रिया चल रही है. यह 20 जनवरी से 25 जनवरी तक संपन्न हो जाएगी. इस प्रक्रिया के बाद जो शेष बचेंगे उनके के बारे में भी सरकार विचार करेगी.

अतिथि विद्वानों की नियमितीकरण की मांग को लेकर उन्होंने कहा कि इसके लिए कर्मचारी आयोग का गठन किया गया है, वह इस विषय पर काम कर रहा है. मंत्री के जवाब पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मंत्री गोलमोल जवाब दे रहे हैं. सटीक जानकारी नहीं दी जा रही है. विपक्ष का आरोप था कि 15 साल से अध्यापन का कार्य कर रहे अतिथि विद्वानों को बाहर किया जा रहा है.

भील जाति का उठा मुद्दा

विधायक कांतिलाल भूरिया ने आज लोक सेवा आयोग की परीक्षा में पूछे गए भील जाति को लेकर प्रश्न का मुद्दा उठाया. इस पर संसदीय कार्यमंत्री डा. गोविंद सिंह ने कहा कि इस मामले में जांच के आदेश दिए जा चुके हैं. इस बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, कार्रवाई की जाएगी. इसमें कोई पक्षपात की बात नहीं, यह इंसाफ की बात है.

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